देहरादून: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही कुमारी सैलजा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है। मनरेगा (MGNREGA) योजना को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, सैलजा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार न केवल इस ऐतिहासिक योजना का स्वरूप बिगाड़ रही है, बल्कि इसके माध्यम से गरीबों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारों पर प्रहार का आरोप
कुमारी सैलजा ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए ‘काम के अधिकार’ की गारंटी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजना का नाम बदलने या इसमें तकनीकी जटिलताएँ पैदा करके इसे कमजोर कर रही है। सैलजा के अनुसार, बजट में कटौती और भुगतान में देरी इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है ताकि लोग इस योजना से विमुख हो जाएं।
बजट कटौती और श्रमिकों की अनदेखी
कांग्रेस नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ सरकार मनरेगा के बजट में लगातार कटौती कर रही है। उन्होंने कहा कि “मनरेगा को केवल गड्ढे खोदने वाली योजना बताना गरीबों के श्रम का अपमान है। यह योजना संकट के समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुई है, जिसे अब खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।”
उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में चुनौती
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कुमारी सैलजा ने कहा कि यहां के युवाओं और महिलाओं के लिए मनरेगा आजीविका का एक मुख्य साधन है। पलायन रोकने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया और मनरेगा को कमजोर करना जारी रखा, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध करेगी।
डिजिटलीकरण के नाम पर शोषण
सैलजा ने ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ (NMMS) जैसी अनिवार्य डिजिटल उपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे दुर्गम इलाकों में, जहाँ नेटवर्क की भारी समस्या है, वहां ऐसी व्यवस्था लागू करना गरीब मजदूरों को उनके हक से वंचित करने जैसा है। उन्होंने मांग की कि सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाए न कि उन्हें इतना कठिन कर दे कि मजदूर काम छोड़ने पर मजबूर हो जाएं।





