काठमांडू। नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता के बीच सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया है। कार्की अंतरिम सरकार का नेतृत्व करेंगी और उन्हें व्यापक दलगत समर्थन भी मिलने लगा है। इस बीच आठ राजनीतिक दलों ने संसद भंग करने के हालिया कदम को ‘असांविधानिक’ बताते हुए खुलकर विरोध दर्ज कराया है।
सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से जारी तीव्र राजनीतिक परामर्श के बाद अधिकांश दल इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मौजूदा संकट से उबरने के लिए एक निष्पक्ष और विश्वसनीय नेतृत्व की जरूरत है। इसी कारण कार्की को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाने पर सहमति बनी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कार्की की निष्पक्ष छवि और न्यायपालिका में उनके लंबे अनुभव ने इस सहमति को आसान बना दिया।
संसद भंग करने के मुद्दे पर आठ दलों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि यह कदम न केवल संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी आघात पहुंचाता है। दलों ने राष्ट्रपति और संवैधानिक निकायों से मांग की है कि संसद को बहाल किया जाए और संवैधानिक व्यवस्था को ठोस आधार दिया जाए।
इस घटनाक्रम के बाद नेपाल की राजनीति में नया समीकरण बनता दिख रहा है। कार्की के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अंतरिम सरकार का गठन करना और विभिन्न दलों को मंत्रिमंडल विस्तार में समुचित प्रतिनिधित्व देना होगी। साथ ही, कानून-व्यवस्था बहाल करने और आगामी चुनावों की तैयारी को भी प्राथमिकता देनी होगी।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि कार्की सभी दलों को विश्वास में लेकर कामयाब रहीं तो नेपाल में स्थिरता की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।





