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कानपुर नरसंहार: 12 सेंटीमीटर का घाव और 5 दिन पहले रची गई थी हत्या की साजिश; कातिल पिता के खिलाफ 15 दिन में दाखिल होगी चार्जशीट

कानपुर: किदवई नगर के त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में अपनी ही जुड़वां बेटियों की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी शशिरंजन मिश्रा को पुलिस ने जेल भेज दिया है। जांच के दौरान जैसे-जैसे परतें खुल रही हैं, इस हत्याकांड की वीभत्सता और आरोपी की क्रूरता के ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जिन्होंने पुलिस और डॉक्टरों तक को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगले 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का निर्णय लिया है ताकि केस को ‘फास्ट ट्रैक’ पर ले जाकर आरोपी को सख्त सजा दिलाई जा सके।

साजिश की पुष्टि: 500 रुपये में खरीदा था ‘मौत का हथियार’

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह हत्याकांड आवेश में आकर किया गया कृत्य नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।

  • पहले से तैयारी: आरोपी शशिरंजन ने हत्या में इस्तेमाल किया गया स्टील का भारी चापड़ घटना से पांच दिन पहले ही मूलगंज इलाके से 500 रुपये में खरीदा था।
  • साक्ष्यों का मिलान: फॉरेंसिक टीम द्वारा किए गए ‘बेंजीडाइन परीक्षण’ में आरोपी के हाथों और कपड़ों पर मासूम बच्चियों के खून के निशान मिले हैं, जो उसकी संलिप्तता का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रमाण है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: डॉक्टरों के भी कांप उठे हाथ

मासूम रिद्धि और सिद्धि के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के दल ने जो मंजर देखा, वह अत्यंत विचलित करने वाला था।

  • क्रूरतम प्रहार: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दोनों बच्चियों के गले पर चापड़ रखकर हथौड़े से वार किया गया था, जिससे उनके गले पर 12 सेंटीमीटर गहरा घाव हो गया था।
  • गंभीर चोट: श्वास नली के समीप घाव की लंबाई 4 सेंटीमीटर और चौड़ाई 3 सेंटीमीटर पाई गई, जो दर्शाता है कि आरोपी ने बच्चियों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया।

पत्नी रेशमा के सनसनीखेज खुलासे: नशे का अड्डा बना था घर

आरोपी की पत्नी रेशमा ने पुलिस को दिए बयान में शशिरंजन के काले कारनामों की पूरी जानकारी दी है।

  • मुलाकात और विवाह: रेशमा मूलतः पश्चिम बंगाल (कलिम्पोंग) की रहने वाली हैं, जो 2010 में नौकरी के लिए कानपुर आई थीं। स्वरूपनगर के एक पार्लर में काम करने के दौरान शशिरंजन से उनकी मुलाकात हुई और 4 साल की दोस्ती के बाद दोनों ने मंदिर में विवाह किया था।
  • शराब और नशीली दवाएं: शादी के बाद शशिरंजन शराब का लती हो गया था। वह अपने मेडिकल पेशे से जुड़े दोस्तों को घर बुलाकर अक्सर ‘नॉनवेज और दारू पार्टी’ करता था।
  • अमानवीय व्यवहार: पत्नी और बच्चियों के सामने ही वह नशे में धुत रहता था और विरोध करने पर पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट करता था।

मजबूत गवाह और पुलिस की रणनीति

पुलिस इस केस को ‘वॉटरटाइट’ (अत्यंत मजबूत) बनाने के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों को जोड़ रही है।

  1. मुख्य गवाह: आरोपी की पत्नी रेशमा, अपार्टमेंट का सुरक्षा गार्ड प्रेमनारायण दीक्षित और घर की नौकरानी अमरावती उर्फ आशा को इस मामले का प्रमुख गवाह बनाया गया है।
  2. नौकरानी का बयान: नौकरानी ने भी पुलिस को बताया है कि शशिरंजन अक्सर घर में नशा करता था और उसका व्यवहार असामान्य रहता था।
  3. चार्जशीट की तैयारी: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ऐसी चार्जशीट तैयार कर रहे हैं जिससे आरोपी का बच निकलना नामुमकिन होगा।

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