नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि निजी शिक्षा संस्थानों में भी आरक्षण लागू किया जाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब सरकारी संस्थानों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, तो निजी संस्थानों को इससे बाहर रखना अन्यायपूर्ण है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा वह आने वाले शीतकालीन सत्र में मजबूती से उठाएगी और सरकार से इसके लिए कानून लाने की मांग करेगी। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि शिक्षा हर वर्ग का मौलिक अधिकार है और सामाजिक न्याय की भावना तभी साकार होगी जब निजी संस्थानों पर भी आरक्षण लागू हो।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे वंचित वर्गों के लिए उच्च शिक्षा पाना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल सरकारी कॉलेजों तक सीमित रह जाने से अवसरों में असमानता और बढ़ेगी।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस पर गंभीरता से कदम नहीं उठाती तो कांग्रेस सड़क से संसद तक आंदोलन करेगी। कांग्रेस का तर्क है कि निजी संस्थानों में आरक्षण लागू करने से लाखों गरीब, पिछड़े और दलित छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा और समाज में समानता को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यदि लागू हुआ तो शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। हालांकि निजी संस्थानों के संगठन इस तरह की किसी भी अनिवार्यता का विरोध कर सकते हैं, क्योंकि उनका कहना है कि इससे संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होगी।
अब निगाहें शीतकालीन सत्र पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस पर कोई पहल करती है या नहीं।





