नई दिल्ली: देशभर में ऐप-आधारित टैक्सी और बाइक-टैक्सी सेवाओं का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए कल यानी 7 फरवरी 2026 (शनिवार) का दिन मुश्किलों भरा हो सकता है। ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने अपनी मांगों को लेकर ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ हड़ताल का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत ड्राइवर देशभर में कम से कम 6 घंटे तक अपने ऐप्स को ‘ऑफलाइन’ रखेंगे, जिससे कैब, ऑटो-रिक्शा और बाइक-टैक्सी की उपलब्धता पर गहरा असर पड़ेगा। इस हड़ताल का नेतृत्व ‘तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन’ (TGPWU) और कई अन्य राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा किया जा रहा है।
क्यों हो रही है हड़ताल? ‘अंतहीन शोषण’ का आरोप
यूनियनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी समस्याओं को साझा करते हुए इस हड़ताल के पीछे मुख्य रूप से ‘अंतहीन शोषण’ और ‘अनियंत्रित किराया प्रणाली’ को जिम्मेदार ठहराया है:
- किराया निर्धारण में मनमानी: ड्राइवरों का आरोप है कि कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय कर रही हैं, जिससे उनकी आय में भारी गिरावट आई है।
- न्यूनतम किराए की कमी: सरकार द्वारा कोई न्यूनतम बेस फेयर (Base Fare) तय न होने के कारण ड्राइवरों को लागत के मुकाबले बहुत कम पैसे मिलते हैं।
- आर्थिक तंगी: हालिया आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 40% गिग वर्कर महीने में ₹15,000 से भी कम कमा पा रहे हैं, जिससे उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रमुख मांगें: क्या चाहते हैं ड्राइवर?
यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- न्यूनतम बेस फेयर का निर्धारण: केंद्र और राज्य सरकारें तत्काल ऐप-आधारित सेवाओं के लिए न्यूनतम किराया अधिसूचित करें।
- निजी वाहनों पर रोक: कमर्शियल उद्देश्यों के लिए निजी (सफेद नंबर प्लेट) वाहनों और बाइक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, क्योंकि इससे वैध लाइसेंस वाले ड्राइवरों की कमाई प्रभावित हो रही है।
- एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 में बदलाव: यूनियन उस ‘क्लॉज 17.3’ को हटाने की मांग कर रही है जो कंपनियों को बेस फेयर से 50% तक कम कीमत पर राइड देने की अनुमति देता है।
- सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा की मांग की जा रही है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
हड़ताल के कारण शनिवार को बड़े शहरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद में परिवहन सेवाएं बाधित रह सकती हैं:
- पीक आवर्स में दिक्कत: सुबह और शाम के ऑफिस समय के दौरान कैब मिलना मुश्किल हो सकता है या भारी ‘सर्रज प्राइस’ (किराया वृद्धि) का सामना करना पड़ सकता है।
- एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन: हवाई अड्डों और स्टेशनों तक जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों को वैकल्पिक साधनों जैसे मेट्रो या स्थानीय बसों का उपयोग करने की सलाह दी है।
निष्कर्ष: सरकार के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में करीब 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स हैं और उनकी समस्याओं का समाधान न होना अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। हालांकि ‘भारत टैक्सी’ जैसे नए सहकारी (Cooperative) प्लेटफॉर्म बाजार में आ रहे हैं, लेकिन ओला-उबर जैसी बड़ी कंपनियों के ड्राइवरों की नाराजगी फिलहाल कम होती नहीं दिख रही है।
“जब तक सरकार न्यूनतम किराया तय नहीं करती और हमारा शोषण बंद नहीं होता, यह लड़ाई जारी रहेगी। हम केवल अपना हक मांग रहे हैं ताकि हम भी सम्मान के साथ जी सकें।” — शेख सलाउद्दीन, अध्यक्ष, TGPWU





