Thursday, March 5, 2026

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कर्नाटक विधान परिषद में भारी बवाल: राज्यपाल के अपमान के आरोपों पर विपक्ष का हंगामा, तीन बार स्थगित हुई सदन की कार्यवाही

बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद में शनिवार को उस समय भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत के कथित अपमान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जदयू (JDS) के सदस्यों ने सदन में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष के कड़े विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही को एक-दो बार नहीं, बल्कि तीन बार स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के इशारे पर संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल का अनादर किया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

हंगामे की शुरुआत: ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारों पर रार

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी नेता सदन के बीचों-बीच (वेल) आ गए। उन्होंने हाल के दिनों में सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा राज्यपाल के खिलाफ की गई टिप्पणियों और प्रदर्शनों का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने दावा किया कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। भाजपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल को उनके अधिकारों का प्रयोग करने से रोका जा रहा है और उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

तीन बार हुआ सदन का स्थगन

हंगामे के कारण सदन में कामकाज करना असंभव हो गया:

  1. पहला स्थगन: कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद जब सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे, तो सभापति ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहने पर सदन को पहली बार स्थगित किया गया।
  2. दूसरा स्थगन: सदन दोबारा शुरू हुआ तो फिर से गर्मागर्मी बढ़ गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद सभापति ने फिर से कार्यवाही रोक दी।
  3. तीसरा स्थगन: दोपहर के सत्र में भी जब विपक्ष राज्यपाल के मुद्दे पर माफी की मांग पर अड़ा रहा, तो सभापति ने तीसरी बार सदन स्थगित कर दिया।

विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप

  • विपक्ष का तर्क: “राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं। उनके खिलाफ प्रदर्शन करना और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना लोकतंत्र का अपमान है। हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक सरकार इस पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करती।”
  • सत्ता पक्ष का जवाब: कांग्रेस मंत्रियों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्यपाल के कुछ हालिया फैसले ‘राजनीति से प्रेरित’ लग रहे हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सबको है। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

क्या है विवाद की जड़?

गौरतलब है कि कर्नाटक में पिछले कुछ समय से राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच तनाव चल रहा है। कई मामलों में राज्यपाल द्वारा जांच की अनुमति दिए जाने और सरकार के कुछ फैसलों पर सवाल उठाने के बाद से कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता राज्यपाल के खिलाफ मुखर हैं। इसी खींचतान की गूंज अब विधान परिषद में सुनाई दे रही है।

जनता के मुद्दों पर लगा विराम

हंगामे और बार-बार के स्थगन के कारण जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों और विकास कार्यों पर चर्चा नहीं हो सकी। सभापति ने सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा का सम्मान करने की अपील की है, लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए सोमवार को भी सदन में हंगामे के आसार बने हुए हैं।

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