चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित करने की अनुमति दे दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि ये नियुक्तियां अस्थायी होंगी और अंतिम फैसला न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगा।
यह मामला उस जनहित याचिका के बाद अदालत पहुंचा था, जिसमें सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया था कि सरकारी नौकरियां समान अवसर और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि करूर भगदड़ मामले की सुनवाई अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले नियुक्तियां देना उचित नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए नौकरी देने के फैसले का बचाव किया। अदालत ने सरकार के कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि नियुक्तियां फिलहाल अस्थायी रहेंगी और इनका भविष्य न्यायालय के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में करूर में एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। सरकार ने मृतकों के परिजनों को राहत एवं पुनर्वास के तहत सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी, जिस पर कानूनी विवाद खड़ा हो गया।





