ब्रुसेल्स। पाकिस्तान की नीतियों पर यूरोपीय सांसदों ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। यूरोपीय संसद के कई सदस्यों ने कहा है कि पाकिस्तान लगातार कट्टरपंथ और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, ऐसे में उसे दिए गए जीएसपी प्लस (GSP+) दर्जे को तुरंत समाप्त कर देना चाहिए।
सांसदों का कहना है कि यूरोपीय संघ (EU) ने पाकिस्तान को विशेष व्यापारिक रियायतें इस शर्त पर दी थीं कि वह मानवाधिकारों की रक्षा करेगा, धार्मिक अल्पसंख्यकों को समान अधिकार देगा और चरमपंथी गतिविधियों पर लगाम लगाएगा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने इन प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया है।
यूरोपीय सांसदों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सरकार और उसकी संस्थाएँ चरमपंथी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं। उलटे, कई बार वहां की नीतियां और फैसले कट्टरपंथियों को बढ़ावा देते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के साथ बढ़ते भेदभाव, जबरन धर्म परिवर्तन और आतंकवादी नेटवर्क को शह देने जैसी घटनाएँ यूरोपीय मूल्यों के खिलाफ हैं।
सांसदों ने जोर देकर कहा कि ऐसे हालात में पाकिस्तान को जीएसपी प्लस जैसे व्यापारिक विशेषाधिकार देना उचित नहीं है। उनका कहना है कि इस सुविधा से पाकिस्तान को हर साल अरबों डॉलर का आर्थिक लाभ होता है, लेकिन वह इसे सामाजिक सुधार और मानवाधिकार संरक्षण पर खर्च करने के बजाय चरमपंथी ताकतों को मजबूत करने में उपयोग करता है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान को 2014 में यूरोपीय संघ की ओर से GSP+ सुविधा दी गई थी। इसके तहत पाकिस्तान को यूरोपीय बाजारों में कई उत्पादों के निर्यात पर विशेष छूट और कर-मुक्ति का लाभ मिलता है। इसकी वैधता 2027 तक बढ़ाई गई है, लेकिन अब यूरोपीय सांसदों का दबाव बढ़ने से इस दर्जे पर संकट मंडरा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान से यह सुविधा वापस ले ली, तो उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान के लिए यह झटका उसकी राजनीतिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।





