पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा, और इसके पीछे की प्रमुख वजहों में से एक रही एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सेंधमारी। ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल की कई सीटों पर प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिससे राजद का परंपरागत MY (मुस्लिम–यादव) समीकरण बिखर गया।
महागठबंधन को कुल 23 प्रतिशत वोट मिलने के बावजूद सीटों में इसका लाभ नहीं मिल पाया। इसका मुख्य कारण वोटों का बिखराव माना जा रहा है। सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में ओवैसी की पार्टी ने निर्णायक वोट काटे, जिससे राजद के विश्वस्त वोट बैंक में सीधी सेंध लगी। कई सीटों पर महागठबंधन और एनडीए के बीच बेहद कम अंतर रहा, और AIMIM के वोट निर्णायक साबित हुए।
विश्लेषकों का कहना है कि MY समीकरण वर्षों से राजद की राजनीतिक रीढ़ रहा है। लेकिन इस बार मुस्लिम मतदाताओं का भारी हिस्सा ओवैसी की ओर झुक गया, जबकि यादव वोट भी कई क्षेत्रों में एकजुट नहीं रहे। इससे महागठबंधन की पूरी रणनीति प्रभावित हुई।
इसके अलावा, एनडीए के बेहतर बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों को पुनर्संगठित करने की रणनीति ने विपक्ष को सीटों में पिछाड़ दिया। 23 प्रतिशत के मजबूत वोट शेयर के बावजूद महागठबंधन को अपेक्षित सीटें नहीं मिल सकीं।
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, यह परिणाम राजद के लिए चेतावनी है कि बदलते राजनीतिक परिवेश में पुराने समीकरणों पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं। सीमांचल क्षेत्र में ओवैसी की मजबूती और मुस्लिम मतदाताओं का पुनर्गठन आगे भी बिहार की राजनीति को प्रभावित करेगा।





