चेन्नई। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने शनिवार को कहा कि हाल ही में चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस बात का प्रतीक है कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना किस तरह से तालमेल और एकीकरण के साथ किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं। चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने तीनों सेनाओं के बीच मौजूद जॉइंटनेस (संयुक्तता) और इंटरऑपरेबिलिटी को दुनिया के सामने उजागर किया है।
एयर चीफ मार्शल चौधरी ने बताया कि इस अभियान में तीनों सेनाओं ने समन्वय के साथ अपनी-अपनी भूमिका निभाई। चाहे हवाई मार्ग से त्वरित प्रतिक्रिया बल की तैनाती हो, नौसेना की ओर से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना हो या थल सेना की ओर से जमीनी मोर्चे पर तैयारी—हर कदम पर बेहतरीन सामंजस्य देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध और संकट पारंपरिक नहीं होंगे, बल्कि बहुआयामी चुनौतियां पेश करेंगे। ऐसे में सेनाओं का आपसी तालमेल ही भारत की सबसे बड़ी ताकत साबित होगा। वायुसेना प्रमुख के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस दिशा में एक अहम प्रयोग रहा, जिसने यह साबित किया कि भारतीय सेनाएं किसी भी परिस्थिति में एक साथ मिलकर कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत की सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में तकनीक, प्रशिक्षण और संयुक्त अभियान क्षमता को बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने तीनों सेनाओं के संयुक्त अभ्यासों को और अधिक नियमित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर न केवल भारत की सैन्य तैयारी का प्रदर्शन था, बल्कि यह संदेश भी था कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना पूरी एकजुटता से देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
एयर चीफ मार्शल चौधरी के संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में भारत की सैन्य रणनीति का मूल आधार संयुक्त अभियान और इंटरऑपरेबिलिटी होगा।





