नई दिल्ली। भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की युद्ध क्षमता और प्रभाव को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस के इस्तेमाल के बाद इसकी मारक क्षमता और सटीकता ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में ध्यान आकर्षित किया है।
ब्रह्मोस की सफलता के बाद पाकिस्तान के जेएफ-17 लड़ाकू विमान को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जेएफ-17 को लेकर कुछ देशों की रुचि बढ़ी है और पाकिस्तान इसे अपने रक्षा निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को तेज गति, सटीक निशाने और कम प्रतिक्रिया समय जैसी खूबियों के कारण दुनिया की प्रमुख क्रूज मिसाइल प्रणालियों में शामिल किया जाता है।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित यह मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से तैयार की गई है। इसके विभिन्न संस्करण थल, जल और वायु सेनाओं के लिए विकसित किए गए हैं। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तरह की अत्याधुनिक प्रणालियां किसी भी देश की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वहीं, पाकिस्तान अपने जेएफ-17 लड़ाकू विमान को किफायती और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान के तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा दे रहा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी हथियार प्रणाली की मांग उसकी तकनीकी क्षमता, लागत, रखरखाव और युद्ध में प्रदर्शन जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद दक्षिण एशिया की रक्षा क्षमताओं को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा बढ़ी है और दोनों देशों की सैन्य तकनीक पर दुनिया की नजर बनी हुई है।




