वॉशिंगटन/तेहरान: अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने ईरान के आधिकारिक झंडे को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बदल दिया है। ‘X’ पर अब ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक के आधिकारिक प्रतीक की जगह ऐतिहासिक और पारंपरिक ‘शेर और सूरज’ (Lion and Sun) वाला झंडा दिखाई दे रहा है। मस्क के इस फैसले को ईरान के वर्तमान शासन के खिलाफ एक बड़ी चुनौती और वहां चल रहे विरोध प्रदर्शनों के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है नया बदलाव?
आमतौर पर किसी देश के नाम के साथ ‘X’ पर उस देश का आधिकारिक झंडा दिखाई देता है। ईरान के मामले में अब तक वहां के वर्तमान शासन का झंडा (जिसमें बीच में ‘अल्लाह’ का प्रतीक है) इस्तेमाल होता था।
- पुराना प्रतीक हटा: मस्क ने अब इस प्रतीक को हटाकर 1979 की क्रांति से पहले वाले ईरान के ऐतिहासिक झंडे को प्लेटफॉर्म पर अपडेट कर दिया है।
- ऐतिहासिक महत्व: ‘शेर और सूरज’ का प्रतीक प्राचीन फारसी गौरव का हिस्सा रहा है और इसे अब ईरानी विपक्षी समूहों और वर्तमान शासन के विरोधियों द्वारा ‘स्वतंत्र ईरान’ के प्रतीक के रूप में उपयोग किया जाता है।
क्यों अहम है मस्क का यह फैसला?
एलन मस्क लंबे समय से ईरान में अभिव्यक्ति की आजादी और वहां की महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में मुखर रहे हैं।
- विरोध प्रदर्शनों को समर्थन: ईरान में ‘हिजाब विरोधी’ आंदोलनों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मस्क ने पहले भी वहां ‘स्टारलिंक’ इंटरनेट सेवा देने का वादा किया था।
- भू-राजनीतिक तनाव: इस बदलाव के बाद तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। ईरानी सरकार ने पहले ही ‘X’ को अपने देश में प्रतिबंधित कर रखा है, लेकिन अब इस कदम को सीधे तौर पर उनकी संप्रभुता को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
ईरानी शासन की प्रतिक्रिया और वैश्विक चर्चा
ईरान के आधिकारिक हलकों में इस पर तीखी प्रतिक्रिया होने की संभावना है।
- शासन का रुख: ईरानी अधिकारी अक्सर एलन मस्क और उनकी कंपनियों पर पश्चिमी देशों के ‘एजेंट’ के रूप में काम करने का आरोप लगाते रहे हैं।
- इंटरनेट पर ट्रेंड: ‘X’ पर यह बदलाव होते ही ईरानी प्रवासियों और स्वतंत्रता समर्थकों के बीच खुशी की लहर देखी गई और #FreeIran जैसे हैशटैग फिर से ट्रेंड करने लगे हैं।
निष्कर्ष: ‘X’ अब केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि राजनैतिक हथियार?
एलन मस्क द्वारा किसी देश के आधिकारिक झंडे को बदलना यह दर्शाता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब केवल सूचना के साधन नहीं रहे, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और विचारधारा की जंग के मैदान बन गए हैं। विशेषज्ञ इसे मस्क की ‘डिजिटल कूटनीति’ का हिस्सा मान रहे हैं।





