नई दिल्ली। घरेलू विमान सेवाओं को राहत देने के लिए प्रमुख हवाई अड्डों पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में दी गई 25 प्रतिशत की अस्थायी छूट आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। सूत्रों के अनुसार, तीन महीने की यह राहत अवधि समाप्त हो चुकी है और अब तक इसे बढ़ाने संबंधी कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है।
केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव और विमानन ईंधन की बढ़ती लागत के कारण एयरलाइनों पर बढ़े वित्तीय दबाव को देखते हुए अप्रैल में यह राहत दी थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निर्देश पर एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने प्रमुख हवाई अड्डों पर सभी घरेलू उड़ानों के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती तीन महीने के लिए लागू की थी।
सूत्रों का कहना है कि प्रमुख हवाई अड्डों के संचालकों को छूट अवधि बढ़ाने का कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में यह रियायत स्वतः समाप्त मानी जा रही है। हालांकि, इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उधर, निजी हवाई अड्डा संचालकों के संगठन ने भी सरकार से अनुरोध किया था कि अस्थायी राहत अवधि समाप्त होने के बाद सामान्य शुल्क व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि हवाई अड्डों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई हो सके। एयरलाइनों का मानना है कि शुल्क में मिली छूट से परिचालन लागत कम करने में कुछ राहत मिली थी, लेकिन इसके समाप्त होने से लागत फिर बढ़ सकती है।
अब विमानन क्षेत्र की निगाहें केंद्र सरकार और एईआरए के अगले निर्णय पर टिकी हैं। यदि कोई नया आदेश जारी नहीं होता है, तो प्रमुख हवाई अड्डों पर घरेलू उड़ानों के लिए पहले से लागू सामान्य लैंडिंग और पार्किंग शुल्क ही प्रभावी रहेगा।





