नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का वैश्विक पावरहाउस बनाने के लिए एक अभूतपूर्व रोडमैप तैयार किया है। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में ‘यूपीआई’ (UPI) की क्रांतिकारी सफलता से प्रेरणा लेते हुए, केंद्र सरकार अब स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और प्रशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष ‘सेक्टर-विशिष्ट एआई मॉडल’ विकसित करने की योजना बना रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत भारत में एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 200 अरब डॉलर (लगभग ₹16.6 लाख करोड़) का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल भारत की जीडीपी को गति देगा, बल्कि आम नागरिक के जीवन को तकनीक के माध्यम से और अधिक सरल बनाएगा।
यूपीआई मॉडल की तर्ज पर ‘ओपन एआई इकोसिस्टम’
जिस तरह यूपीआई ने बैंकिंग को हर मोबाइल तक पहुँचाया, उसी तरह सरकार एआई को भी लोकतांत्रिक बनाना चाहती है:
- साझा डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर: सरकार एक ऐसा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार कर रही है, जहाँ स्टार्टअप्स और कंपनियां सरकारी डेटा का सुरक्षित उपयोग कर नए एआई समाधान विकसित कर सकेंगी।
- सेक्टर-विशिष्ट मॉडल: खेती के लिए ‘एग्रो-एआई’, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ‘हेल्थ-एआई’ और भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए ‘भाषिणी’ जैसे मॉडलों को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा।
- किफायती समाधान: भारतीय एआई मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और किफायती बनाने पर जोर दिया जाएगा ताकि विकासशील देश भी इसे अपना सकें।
200 अरब डॉलर का निवेश: कहां खर्च होगा पैसा?
यह विशाल निवेश अगले कुछ वर्षों में विभिन्न चरणों में किया जाएगा:
- कंप्यूटिंग पावर (GPU): भारत में शक्तिशाली ‘सुपर-कंप्यूटिंग’ हब स्थापित किए जाएंगे। सरकार हजारों की संख्या में जीपीयू (GPUs) खरीदेगी ताकि एआई मॉडलों की ट्रेनिंग तेज हो सके।
- स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन: निवेश का एक बड़ा हिस्सा भारतीय एआई स्टार्टअप्स को फंडिंग, सब्सिडी और तकनीकी सहायता देने में खर्च होगा।
- एआई स्किल्स: देश के युवाओं को एआई और डेटा साइंस में प्रशिक्षित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष शोध केंद्र (Centers of Excellence) बनाए जाएंगे।
- डेटा सेंटर: देश के भीतर ही डेटा स्टोर करने के लिए विशाल डेटा पार्कों का निर्माण किया जाएगा।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
इस पहल का सीधा असर आम भारतीय के जीवन स्तर पर पड़ेगा:
- सटीक खेती: किसानों को मौसम और मिट्टी की जानकारी एआई के जरिए अपनी स्थानीय भाषा में मिलेगी, जिससे फसल की पैदावार बढ़ेगी।
- स्मार्ट हेल्थकेयर: दूरदराज के गांवों में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स के जरिए गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
- पारदर्शी शासन: सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और बिना किसी देरी के लाभार्थियों तक पहुँचेगा, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।





