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ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट को पार कर गुजरात पहुंचे भारतीय जहाज; एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित

अहमदाबाद/कांडला (17 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से एलपीजी (LPG) और कच्चा तेल लेकर आ रहे भारतीय ध्वज वाले तीन विशाल टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं। युद्ध की विभीषण झेल रहे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे खतरनाक समुद्री मार्ग से गुजरने के बावजूद, भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी ने देश की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं को कम कर दिया है।

गुजरात के तट पर पहुंचे जहाज: ‘शिवालिक’ ने डाला लंगर

भारतीय नौसेना और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में ये जहाज अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं:

  • जहाज ‘शिवालिक’: लगभग 46,000 टन एलपीजी लेकर यह जहाज सफलतापूर्वक गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इसकी सुरक्षित लैंडिंग से घरेलू गैस की आपूर्ति को बड़ी मजबूती मिली है।
  • जहाज ‘नंदा देवी’: यह टैंकर आज गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। इस जहाज पर भी भारी मात्रा में ईंधन लदा हुआ है।
  • जहाज ‘जग लाडकी’: यूएई से कच्चा तेल लेकर आ रहा यह जहाज भी अपनी यात्रा के अंतिम चरण में है और जल्द ही मुंद्रा बंदरगाह पर लंगर डालेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य: सबसे खतरनाक रास्ते से सुरक्षित वापसी

इन जहाजों की यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्हें ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से होकर गुजरना पड़ा, जो वर्तमान में वैश्विक संघर्ष का केंद्र बना हुआ है:

  1. सामरिक चुनौती: ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ था।
  2. भारतीय ध्वज की सुरक्षा: सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही भारत की तटस्थ कूटनीति और क्षेत्र में मजबूत सामरिक साख का परिणाम है।
  3. ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित: इन टैंकरों के पहुंचने से स्पष्ट हो गया है कि युद्ध के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित गलियारे बनाए रखने में सक्षम है।

तत्काल राहत: नहीं होगी ईंधन की किल्लत

पिछले कुछ दिनों से खाड़ी देशों में युद्ध के चलते भारत में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की किल्लत की आशंका जताई जा रही थी:

  • बाजार में स्थिरता: एक साथ तीन बड़े टैंकरों के आने से घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।

बफर स्टॉक: सरकार इन खेपों का उपयोग बफर स्टॉक को सुदृढ़ करने के लिए करेगी, ताकि भविष्य में युद्ध और गहराने पर भी आपूर्ति बाधित न हो।

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