आबू धाबी/नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की प्रमुख ऊर्जा कंपनी ‘एडनॉक’ (ADNOC) ने एक अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कंसोर्टियम के साथ 2.5 बिलियन डॉलर (लगभग 20,000 करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक गैस आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक सौदे के तहत यूएई आने वाले वर्षों में भारी मात्रा में ‘तरलीकृत प्राकृतिक गैस’ (LNG) की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरी डील का केंद्र बिंदु भारत है, जो अपनी बढ़ती औद्योगिक जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इस गैस का सबसे बड़ा ग्राहक बनने जा रहा है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि भारत की ऊर्जा निर्भरता के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद स्रोत भी प्रदान करेगा।
क्या है इस गैस डील की खासियत?
यह सौदा यूएई के ‘नेट जीरो’ लक्ष्य और भारत की ‘गैस-आधारित अर्थव्यवस्था’ बनने की महत्वाकांक्षा के बीच एक मजबूत कड़ी है:
- दीर्घकालिक आपूर्ति: इस 2.5 बिलियन डॉलर के समझौते के तहत अगले एक दशक तक गैस की निर्बाध आपूर्ति का प्रावधान है।
- स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प: कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए भारत तेजी से नेचुरल गैस की ओर बढ़ रहा है, और यूएई की यह डील इस बदलाव में ईंधन का काम करेगी।
- रणनीतिक साझेदारी: यह समझौता भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के तहत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता होने के नाते, भारत के लिए यह डील कई मायनों में गेम-चेंजर है:
- किफायती ऊर्जा: सीधे उत्पादक देश (UAE) से बड़ी डील करने से भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिर कीमतों से सुरक्षा मिलेगी और गैस सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकेगी।
- उर्वरक और बिजली क्षेत्र को लाभ: भारत में खाद (Fertilizer) उत्पादन और बिजली घरों में प्राकृतिक गैस की भारी मांग है। इस डील से इन क्षेत्रों को कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा।
- चीन को पछाड़कर बना शीर्ष ग्राहक: हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत ने ऊर्जा आयात के मामले में अपनी स्थिति इतनी मजबूत कर ली है कि वह अब कई खाड़ी देशों के लिए चीन से भी बड़ा बाजार बनकर उभरा है।
एडनॉक (ADNOC) और वैश्विक बाजार पर प्रभाव
यूएई की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी एडनॉक अपनी उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रही है:
- विस्तार योजना: एडनॉक का लक्ष्य साल 2028 तक अपनी एलएनजी उत्पादन क्षमता को दोगुना करना है, और भारत जैसे बड़े बाजार के साथ लंबी अवधि के सौदे उनके इस विस्तार को वित्तीय स्थिरता प्रदान करते हैं।
- रूस-यूक्रेन संकट का असर: यूरोप में गैस की किल्लत के बीच, यूएई ने भारत जैसे एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी है, जो वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच बढ़ते व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंधों का परिणाम इन बड़े आर्थिक समझौतों के रूप में दिख रहा है। 2.5 बिलियन डॉलर की यह गैस डील न केवल भारत के घरों और कारखानों को ऊर्जा देगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत एक ‘ब्राइट स्पॉट’ बना हुआ है जिसकी मांग पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र है।





