देहरादून: उत्तराखंड में जारी ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने प्रशासनिक और बिजली विभागीय कार्यालयों के लिए सख्त नए नियम लागू किए हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि बिजली बचाने के लिए अब सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बिजली की खपत को नियंत्रण में रखने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। इसके तहत सभी विद्युत कार्यालयों में एसी का उपयोग बंद रहेगा। इसके अलावा, अधिकारियों और कर्मचारियों को कारपूल यानी साझा वाहन उपयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।
सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों के बजाय समूह में यात्रा करें, ताकि ईंधन और ऊर्जा की बचत हो सके। ऊर्जा मंत्रालय और बिजली विभाग की ओर से यह कदम विशेष रूप से गर्मियों के मौसम और बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल बिजली की बचत तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण और वाहन प्रदूषण में कमी में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऊर्जा बचत के लिए समय पर और प्रभावी उपाय सुनिश्चित करें।
सरकारी कर्मचारियों के लिए जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि बिजली कार्यालयों में केवल आवश्यक उपकरणों का इस्तेमाल ही किया जाएगा। गैर-जरूरी रोशनी, पंखे और अन्य विद्युत उपकरणों को बंद रखने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके विभागीय कार्यालय में ऊर्जा की खपत न्यूनतम स्तर पर रहे।
इस कदम को राज्य में बढ़ते ऊर्जा संकट के समाधान की दिशा में पहला बड़ा प्रयास माना जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “यह कठिन निर्णय आवश्यक है, ताकि राज्य की जनता को बिजली की आपूर्ति में कोई बाधा न आए और ऊर्जा संकट को नियंत्रण में रखा जा सके।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उपायों से सरकारी कार्यालयों में बिजली की खपत में कम से कम 15-20 प्रतिशत की बचत संभव है। इसके अलावा, कारपूलिंग और एसी बंद करने जैसे कदमों से न केवल ऊर्जा बचत होगी, बल्कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि यदि इन उपायों का सफल पालन किया गया, तो भविष्य में और भी सख्त ऊर्जा बचत नियमों लागू किए जा सकते हैं।





