नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपी और पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद की रिहाई का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस बार इस विवाद में अंतरराष्ट्रीय दखलअंदाजी और घरेलू राजनीति का तड़का लगा है। अमेरिका के कुछ प्रभावशाली सांसदों ने भारत सरकार को पत्र लिखकर उमर खालिद की तत्काल रिहाई की मांग की है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।
अमेरिकी सांसदों का पत्र और मांग
अमेरिकी संसद के कुछ सदस्यों ने एक संयुक्त पत्र जारी किया है, जिसमें उमर खालिद की लंबे समय से चल रही हिरासत पर चिंता व्यक्त की गई है।
- मानवाधिकार का हवाला: सांसदों का तर्क है कि खालिद को बिना किसी ठोस सजा के वर्षों से जेल में रखा गया है, जो मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
- लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई: पत्र में भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए इस मामले में न्यायोचित कार्रवाई करे।
भाजपा का पलटवार: राहुल गांधी को घेरा
जैसे ही अमेरिकी सांसदों का यह पत्र सार्वजनिक हुआ, भाजपा ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया। भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक फोटो पोस्ट की गई, जिसमें राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और विदेशी नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों को इस घटनाक्रम से जोड़कर दिखाया गया है।
- भाजपा का आरोप: भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशों में जाकर भारत विरोधी ताकतों को देश के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए उकसाते हैं।
- टूलकिट का जिक्र: भाजपा प्रवक्ताओं ने इसे एक बार फिर ‘विदेशी टूलकिट’ का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य भारत की न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना और वैश्विक स्तर पर देश की छवि धूमिल करना है।
विवाद की पृष्ठभूमि: क्या है उमर खालिद मामला?
उमर खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाएं कई बार अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि खालिद ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने की साजिश रची थी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और सरकार के रुख के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़कर देख रहा है।
विशेष नोट: इस मामले पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक सक्रिय हैं।





