नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। यह मामला प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कहा गया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के व्यापक तबादलों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से छह विशेषज्ञ चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया, जबकि उनके स्थान पर पांच सामान्य चिकित्सक और केवल एक विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की गई। इसी प्रकार हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज से 16 विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्थानांतरण कर दिया गया है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में केवल दो विशेषज्ञ चिकित्सक ही शेष रह गए हैं, जबकि निर्धारित मानकों के अनुसार यहां कम से कम 15 विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के 112 पद पहले से रिक्त हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्थानांतरण किया गया, लेकिन कई स्थानों पर उनके स्थान पर विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की गई या सामान्य चिकित्सकों को भेज दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत अब सरकार के पक्ष और उपलब्ध कराए जाने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई करेगी।





