देहरादून।
उत्तराखंड में इस बार मानसून और पश्चिमी विक्षोभ का संयुक्त प्रभाव प्रदेश पर भारी पड़ रहा है। पहाड़ी राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि मौसम की तीव्रता अभी भी बरकरार है और अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की संभावना नहीं है।
सड़कें और गांव कटे, यात्रा ठप
लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कई राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें बाधित हो गई हैं। चारधाम यात्रा मार्ग कई जगहों पर बंद पड़ा है, जिससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिससे वहां तक राहत सामग्री पहुंचाना चुनौती बन गया है।
नदियां उफान पर, खतरे का अलर्ट
तेज बारिश से गंगा, अलकनंदा, यमुना और भागीरथी जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है और जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
जान-माल का भारी नुकसान
इस आपदा में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों घायल हैं। कई घर, दुकानें और पुल बह गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की भी भारी हानि हुई है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
सरकार ने बढ़ाई सतर्कता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों को लगातार राहत और बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस बल के जवान संवेदनशील इलाकों में तैनात किए गए हैं। हेलीकॉप्टर से भी राहत सामग्री पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ सक्रिय होने से वर्षा की तीव्रता बढ़ी है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं, लिहाजा लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।





