देहरादून: उत्तराखंड में स्टार्टअप्स की धीमी पड़ चुकी रफ्तार को नई ऊर्जा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कोरोना काल और अन्य तकनीकी कारणों से पिछले दो साल से अटकी ‘स्टार्टअप उत्तराखंड’ प्रतियोगिता का अब ग्रैंड फिनाले होने जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश के होनहार उद्यमियों (Entrepreneurs) को न केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा, बल्कि उन्हें बड़े निवेशकों से फंडिंग हासिल करने का भी सीधा अवसर प्राप्त होगा।
धीमी गति को मिलेगी नई दिशा
पिछले कुछ समय से राज्य में स्टार्टअप गतिविधियों की गति कुछ कम देखी जा रही थी। नीतिगत बदलावों और उचित मंच के अभाव में कई बेहतरीन आइडिया जमीन पर नहीं उतर पा रहे थे। शासन के निर्देश पर अब उद्योग विभाग ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस फिनाले के आयोजन से प्रदेश में ‘स्टार्टअप हब’ बनाने के सपने को फिर से बल मिलेगा।
हजारों आवेदनों में से चुने गए सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप
इस ग्रैंड फिनाले के लिए विभाग को पूरे प्रदेश से हजारों आवेदन प्राप्त हुए थे। कई चरणों की स्क्रीनिंग और बूट कैंप्स के बाद अब अंतिम दौर के लिए सबसे बेहतरीन स्टार्टअप्स का चयन कर लिया गया है। ये स्टार्टअप मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर आधारित हैं:
- एग्रो-टेक: पहाड़ की खेती और बागवानी को तकनीक से जोड़ना।
- हेल्थ-टेक: दुर्गम क्षेत्रों में टेली-मेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना।
- ईको-टूरिज्म: पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना पर्यटन को बढ़ावा देना।
- हस्तशिल्प: स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार दिलाना।
करोड़ों की फंडिंग और सरकारी सहायता
इस फिनाले में देश के नामी ‘एंजल इन्वेस्टर्स’ और ‘वेंचर कैपिटलिस्ट’ हिस्सा लेंगे। चयनित स्टार्टअप्स को सरकार की ओर से न केवल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, बल्कि उन्हें इंक्यूबेशन सेंटर में जगह, पेटेंट फाइल करने में मदद और मेंटरशिप भी प्रदान की जाएगी।
“हमारा लक्ष्य उत्तराखंड के युवाओं को ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनाना है। यह फिनाले राज्य की अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स की भागीदारी सुनिश्चित करने का एक मील का पत्थर साबित होगा।” — उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
स्टार्टअप ईकोसिस्टम को मजबूती
उत्तराखंड सरकार अपनी स्टार्टअप नीति में भी कई महत्वपूर्ण सुधार करने जा रही है। फिनाले के बाद, सफल स्टार्टअप्स को ‘सीड फंडिंग’ (शुरुआती पूंजी) देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। साथ ही, पहाड़ी जिलों के स्टार्टअप्स को विशेष रियायतें देने पर विचार किया जा रहा है ताकि पलायन को रोका जा सके।
दो साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहा यह आयोजन राज्य के युवाओं में नई उम्मीदें जगा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस फिनाले से निकलने वाले नए बिजनेस आइडिया उत्तराखंड की तकदीर बदलने में कितने कामयाब होते हैं।




