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उत्तराखंड में श्रमिकों के लिए बड़ी खुशखबरी: अब केवल 10 घंटे ही ले सकेंगे काम, न्यूनतम मजदूरी में शामिल होगा बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च

देहरादून (20 मार्च, 2026): उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के लाखों श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य के श्रम विभाग ने ‘उत्तराखंड मजदूरी संहिता (Wage Code) नियमावली 2026’ का मसौदा (Draft) जारी कर दिया है। इस नई नियमावली के लागू होने के बाद प्रदेश में न केवल काम के घंटों की सीमा तय होगी, बल्कि पहली बार न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए एक ‘वैज्ञानिक फॉर्मूले’ का उपयोग किया जाएगा। इसमें श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई और परिवार के इलाज का खर्च भी जोड़ा जाएगा

काम के घंटों पर कड़ाई: 10 घंटे के बाद देना होगा ‘ओवर टाइम’

नई नियमावली में श्रमिकों के शोषण को रोकने के लिए कार्य अवधि को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं:

  • अधिकतम कार्य अवधि: अब किसी भी संस्थान या उद्योग में श्रमिकों से विश्राम अंतराल (Rest Interval) सहित अधिकतम 10 घंटे ही काम लिया जा सकेगा।
  • ओवर टाइम का प्रावधान: यदि कोई नियोक्ता 10 घंटे से अधिक काम करवाता है, तो उसे निर्धारित मजदूरी दर से दोगुना भुगतान (Overtime Pay) करना अनिवार्य होगा।
  • साप्ताहिक अवकाश: श्रमिकों को सप्ताह में कम से कम एक दिन का पूर्ण सवैतनिक अवकाश देना अनिवार्य होगा।

न्यूनतम मजदूरी का ‘वैज्ञानिक फॉर्मूला’: शिक्षा और स्वास्थ्य भी शामिल

उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है, जहाँ मजदूरी केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि जीवन स्तर सुधारने के लिए तय होगी:

  1. बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य: पहली बार सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दर तय करते समय श्रमिक के परिवार के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और ईंधन पर होने वाले खर्च को भी गणना में शामिल करने का निर्णय लिया है।
  2. कैलोरी का मानक: मजदूरी तय करते समय प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन की आवश्यकता को मानक माना जाएगा।
  3. कपड़े और आवास: प्रति वर्ष प्रति परिवार 66 मीटर कपड़े और कुल मजदूरी का 10 प्रतिशत आवास किराए के रूप में फॉर्मूले में जोड़ा जाएगा।

पंजीकरण और डिजिटल भुगतान पर जोर

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी किए हैं:

  • डिजिटल सैलरी: सभी नियोक्ताओं को अपने श्रमिकों को वेतन का भुगतान बैंक खातों के माध्यम से (डिजिटल मोड) ही करना होगा, ताकि रिकॉर्ड में हेरफेर न हो सके।
  • वेतन पर्ची (Pay Slip): हर महीने की निश्चित तारीख तक वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा, जिसमें कटौती और भत्तों का पूरा विवरण होगा।

एक माह के भीतर मांगे सुझाव

श्रम विभाग ने इस मसौदे को सार्वजनिक कर दिया है और हितधारकों (मजदूर संगठनों और उद्योगपतियों) से एक माह के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है। इन सुझावों पर विचार करने के बाद नियमावली को अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।

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