देहरादून/राज्य ब्यूरो: उत्तराखंड के निवासियों के लिए जमीन-जायदाद से जुड़ी समस्याओं का समाधान अब और भी आसान होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही एक नया ऑनलाइन शिकायत पोर्टल लॉन्च करने जा रहे हैं, जिसके माध्यम से प्रदेश के नागरिक अपनी जमीन से संबंधित किसी भी गड़बड़ी या शिकायत को घर बैठे दर्ज करा सकेंगे। इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य तहसील और राजस्व कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना है।
पोर्टल की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली
यह नया पोर्टल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- ऑनलाइन शिकायत पंजीकरण: भूमि विवाद, पैमाइश में देरी, या राजस्व कर्मियों द्वारा की जा रही लापरवाही की शिकायत अब सीधे पोर्टल पर की जा सकेगी।
- ट्रैकिंग सुविधा: शिकायतकर्ता को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे वह अपनी शिकायत पर हुई कार्यवाही की स्थिति (Status) को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकेगा।
- समयबद्ध निवारण: पोर्टल को ‘राइट टू सर्विस’ (RTS) के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे अधिकारियों के लिए एक निश्चित समय सीमा के भीतर शिकायत का निस्तारण करना अनिवार्य होगा।
- दस्तावेज अपलोड: शिकायत के समर्थन में नागरिक अपने जमीन के कागजात या अन्य सबूत भी पोर्टल पर डिजिटल रूप में अपलोड कर सकेंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने पहले ही स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के मंत्र पर काम कर रही है।
- बिचौलियों का अंत: ऑनलाइन व्यवस्था होने से पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ जनता का सीधा संपर्क कम होगा, जिससे रिश्वतखोरी की संभावना समाप्त होगी।
- सीधी निगरानी: मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) सीधे इन शिकायतों की निगरानी कर सकेगा, जिससे लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी।
राजस्व विभाग का डिजिटल कायाकल्प
हाल ही में सरकार ने छह अन्य वेब पोर्टल भी लॉन्च किए हैं, जो सत्यापित खतौनी और दाखिल-खारिज जैसी सुविधाएं ऑनलाइन प्रदान कर रहे हैं। यह नया शिकायत पोर्टल इस डिजिटल श्रृंखला की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है।
आम जनता को कैसे होगा लाभ?
- धन और समय की बचत: अब दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए जिला मुख्यालय या देहरादून नहीं आना पड़ेगा।
- भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली: डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण शिकायतों को दबाया नहीं जा सकेगा।
- त्वरित न्याय: लंबित पड़े भूमि विवादों के समाधान में तेजी आएगी, जिससे सामाजिक सौहार्द बढ़ेगा।
निष्कर्ष: सुशासन की ओर बढ़ते कदम
इस पोर्टल के लॉन्च होने के बाद उत्तराखंड राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा। मुख्यमंत्री धामी के इस फैसले को प्रदेश में ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को जमीनी स्तर पर उतारने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।





