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उत्तराखंड में ‘मीठी क्रांति’ की शुरुआत: सीएम आवास में हुआ 60 किलो शहद का उत्पादन; अब प्रदेश भर में बनेंगे ‘3-बी गार्डन’

देहरादून (24 मार्च, 2026):उत्तराखंड सरकार ने राज्य में मधुमक्खी पालन (Beekeeping) को स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाने के लिए एक अनूठी और प्रेरक पहल की है। इस मुहिम की सफलता का प्रमाण स्वयं मुख्यमंत्री आवास से मिला है, जहां हाल ही में वैज्ञानिक पद्धति से किए गए मधुमक्खी पालन के फलस्वरूप 60 किलोग्राम शुद्ध शहद का उत्पादन हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के किसानों और युवाओं के लिए एक प्रेरणा बताते हुए अधिकारियों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘3-बी गार्डन’ (3-B Garden) विकसित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य ‘मीठी क्रांति’ के माध्यम से न केवल शहद उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और परागण (Pollination) के जरिए कृषि उपज में वृद्धि करना भी है।

सीएम आवास बना मिसाल: 60 किलो शहद का रिकॉर्ड उत्पादन

मुख्यमंत्री आवास में मधुमक्खी पालन के सफल प्रयोग ने राज्य के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं:

  • सफल प्रयोग: मुख्यमंत्री आवास परिसर में स्थापित किए गए मौन पालन (मधुमक्खी पालन) केंद्रों से इस सीजन में कुल 60 किलो शहद निकाला गया है।
  • स्वरोजगार का संदेश: मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकारी आवासों और कार्यालयों के खाली परिसर में मधुमक्खी पालन किया जा सकता है, तो यह प्रदेश के काश्तकारों के लिए अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन जरिया बन सकता है।
  • शुद्धता और गुणवत्ता: उत्पादित शहद की गुणवत्ता उच्च स्तर की पाई गई है, जो यह दर्शाता है कि उत्तराखंड की जलवायु और वनस्पतियां मधुमक्खी पालन के लिए विश्वस्तरीय अनुकूलता रखती हैं।

‘3-बी गार्डन’ की संकल्पना: मधुमक्खी, पक्षी और तितलियों का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ‘3-बी गार्डन’ बनाने का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं:

  1. 3-बी का अर्थ: इस विशेष गार्डन में Bee (मधुमक्खी), Bird (पक्षी) और Butterfly (तितली) के संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  2. पारिस्थितिक संतुलन: विशेषज्ञों के अनुसार, ये तीनों जीव पर्यावरण के संतुलन और फसलों के परागण के लिए अनिवार्य हैं। ‘3-बी गार्डन’ के माध्यम से इनके लिए अनुकूल वातावरण और फूलों के बगीचे तैयार किए जाएंगे।
  3. पर्यटन और शिक्षा: इन गार्डनों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि ये न केवल शहद उत्पादन के केंद्र बनें, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और छात्रों के लिए शिक्षा और पर्यटन का केंद्र भी साबित हों।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: शहद से बढ़ेगी किसानों की आय

मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के पीछे सरकार का आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

  • किसानों को प्रोत्साहन: सरकार मधुमक्खी पालन के लिए सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करने की योजना पर काम कर रही है।
  • फसलों की पैदावार में वृद्धि: वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध है कि मधुमक्खियों के कारण होने वाले परागण से बागवानी और कृषि फसलों की पैदावार में 20% से 30% तक की वृद्धि होती है।
  • ब्रांड उत्तराखंड: राज्य सरकार ‘उत्तराखंड हनी’ को एक वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की तैयारी में है, जिससे स्थानीय शहद को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सके।

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