देहरादून (19 मार्च, 2026): उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार अपने चार साल का कार्यकाल पूरा करने के साथ ही अब ‘चुनावी मोड’ में पूरी तरह सक्रिय हो गई है। शासन और संगठन के बीच लंबे समय से चल रहा मंथन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, धामी मंत्रिमंडल के विस्तार (Cabinet Expansion) की रूपरेखा तैयार हो चुकी है और अगले एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ ही, पार्टी के लिए समर्पित 20 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को विभिन्न निगमों, परिषदों और समितियों में ‘दायित्व’ सौंपकर उन्हें सरकार में हिस्सेदारी दी जाएगी।
कैबिनेट में 5 खाली पदों पर टिकी नजरें
वर्तमान में धामी मंत्रिमंडल में कुल 12 में से केवल 7 मंत्री ही कार्यरत हैं, जबकि 5 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं:
- विधायकों की ‘फील्डिंग’: इन 5 सीटों के लिए भाजपा विधायकों के बीच जबरदस्त होड़ मची है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों (गढ़वाल-कुमाऊं संतुलन) को साधने के लिए कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ अनुभवी चेहरों की वापसी की भी चर्चा है।
- परफॉर्मेंस आधारित चयन: मुख्यमंत्री धामी ने संकेत दिए हैं कि नई नियुक्तियों में ‘रिपोर्ट कार्ड’ और आगामी विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यकर्ताओं का ‘वनवास’ होगा खत्म: बांटे जाएंगे 20+ दायित्व
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की मुराद भी पूरी होने वाली है:
- दायित्वधारियों की सूची तैयार: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री धामी के बीच हुए कई दौर के विचार-विमर्श के बाद लगभग दो दर्जन नाम फाइनल कर लिए गए हैं।
- इन पदों पर होगी तैनाती: विभिन्न सरकारी बोर्डों, निगमों और समितियों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पदों पर ये नियुक्तियां की जाएंगी, जिन्हें बोलचाल की भाषा में ‘लाल बत्ती’ दायित्व कहा जाता है।
- मनोबल बढ़ाना मुख्य लक्ष्य: अगले वर्ष (2027) होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी उनके मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचाना चाहती है।
हिंदू नववर्ष पर मिल सकती है ‘सौगात’
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नियुक्तियों के लिए हिंदू नववर्ष (चैत्र नवरात्र के आसपास) का समय चुना गया है:
- हाईकमान की मंजूरी: मुख्यमंत्री के हालिया दिल्ली दौरों के दौरान केंद्रीय नेतृत्व के साथ इस पर विस्तार से चर्चा हो चुकी है। अब केवल अंतिम औपचारिक घोषणा और शपथ ग्रहण का इंतजार है।
- अमित शाह और राजनाथ सिंह के दौरे: गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हरिद्वार से और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा हल्द्वानी से किए गए चुनावी शंखनाद के बाद अब संगठन को मजबूती देने के लिए यह विस्तार अनिवार्य माना जा रहा है।





