Friday, February 6, 2026

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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग: अब ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ संभालेगा कमान; 452 मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। प्रदेश में लंबे समय से संचालित उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। अब राज्य के सभी मान्यता प्राप्त 452 मदरसों के संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों की जिम्मेदारी नवनिर्मित ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ को सौंप दी गई है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा के समान लाना और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना है।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

शासन स्तर पर हुए इस बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण तर्क दिए जा रहे हैं:

  • शिक्षा में एकरूपता: सरकार चाहती है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले जो सामान्य स्कूलों में मिलती है। प्राधिकरण के तहत आने से पाठ्यक्रम में आधुनिक विषयों का समावेश आसान होगा।
  • प्रशासनिक ढांचा: मदरसा बोर्ड एक अलग इकाई के रूप में कार्य कर रहा था, जिसे अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत ‘प्राधिकरण’ में समाहित कर दिया गया है ताकि बेहतर निगरानी और बजट का सही उपयोग हो सके।
  • सुधार की प्रक्रिया: पिछले कुछ समय से मदरसों के सर्वे और जांच की प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें कई खामियां पाई गई थीं। प्राधिकरण के गठन से पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

452 मदरसों पर क्या होगा असर?

इस बदलाव का सीधा प्रभाव राज्य के मान्यता प्राप्त मदरसों पर पड़ेगा:

  1. डिग्रियों की मान्यता: अब मदरसों द्वारा दी जाने वाली डिग्रियां और प्रमाण पत्र अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाएंगे।
  2. पाठ्यक्रम और शिक्षक: मदरसों में एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यक्रम को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। साथ ही, शिक्षकों की नियुक्ति और योग्यता के मानकों में भी बदलाव होने की संभावना है।
  3. पंजीकरण प्रक्रिया: जो मदरसे पहले बोर्ड से संबद्ध थे, उनकी संबद्धता अब स्वतः ही नए प्राधिकरण को हस्तांतरित मानी जाएगी।

विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया

सरकार के इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:

  • समर्थन: कई विशेषज्ञों का मानना है कि प्राधिकरण बनने से शिक्षा के स्तर में सुधार होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
  • विरोध: कुछ मुस्लिम संगठनों और विपक्षी नेताओं ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बोर्ड को खत्म करना मदरसों की स्वायत्तता पर चोट है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नए ढांचे में धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।

निष्कर्ष: आधुनिक मदरसा शिक्षा की ओर कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व में भी कहा था कि “मदरसा के बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में लैपटॉप होना चाहिए।” मदरसा बोर्ड को भंग कर प्राधिकरण के तहत लाना इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि मदरसों के छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हों।

“मदरसा बोर्ड को खत्म कर उसे प्राधिकरण के अधीन लाना प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है। हमारा लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है ताकि हर बच्चे का भविष्य उज्ज्वल हो सके।” — अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड

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