Tuesday, March 3, 2026

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उत्तराखंड में भूकंप से बचाव की बड़ी कवायद, 80 से अधिक स्थानों पर मॉक ड्रिल, डिजिटल ट्विन तकनीक का प्रयोग

देहरादून। भूकंप से बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करने के लिए उत्तराखंड में बुधवार सुबह प्रदेशव्यापी मॉक ड्रिल शुरू हुई। पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ अभ्यास किया जा रहा है। थराली, हरिद्वार और देहरादून सहित कई जिलों में सुबह 10 बजे से ही आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय हो गईं।

एसडीआरएफ से लेकर एनसीसी तक सभी बल मैदान में
राज्य की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, एनसीसी, होमगार्ड और पीआरडी के जवान व्यापक स्तर पर शामिल किए गए हैं। अभ्यास के दौरान टीमों ने वास्तविक भूकंप जैसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए त्वरित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार और सुरक्षित निकासी के उपायों को अंजाम दिया।

पहली बार डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग
इस बार मॉक ड्रिल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल ट्विन तकनीक का प्रयोग रहा।
यह तकनीक किसी स्थान या भवन की वर्चुअल प्रति तैयार करती है, जिससे वास्तविक परिस्थितियों जैसा माहौल बनाकर जोखिम रहित अभ्यास किया जा सकता है।
इससे आपदा के दौरान होने वाली संभावित क्षति, टीमों की प्रतिक्रिया और रेस्क्यू प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझा जा रहा है।

उद्देश्य—सभी जिलों की तैयारियों का परीक्षण
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, उत्तराखंड भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, समुदायों का क्षमता विकास और लगातार प्रशिक्षण जरूरी है।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य सभी जिलों की तैयारी का परीक्षण करना और उन कमियों की पहचान करना है जिन्हें वास्तविक स्थिति आने से पहले सुधारा जा सके।

कई तरह की आपात स्थितियों का अभ्यास शामिल
मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न काल्पनिक परिस्थितियों को शामिल किया गया, जिनमें—

  • बहुमंजिला आवासीय भवन का ढह जाना
  • अस्पताल भवन का आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होना
  • स्कूल और कॉलेज भवनों के क्षतिग्रस्त होने से बच्चों का फंसना
  • बड़ी संख्या में घायलों के रेस्क्यू और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था

इन परिदृश्यों के आधार पर राहत एवं बचाव दलों ने व्यापक अभ्यास किया और तेजी से प्रतिक्रिया देने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

प्रदेशभर में चल रही यह मॉक ड्रिल राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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