देहरादून: उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से भारी पड़ सकते हैं। प्रदेश के ऊर्जा निगमों (UPCL, UJVNL और PTCUL) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों में औसतन 18.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) को सौंपा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने से पहले आज देहरादून में महत्वपूर्ण जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। यदि नियामक आयोग इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो घरेलू से लेकर औद्योगिक श्रेणी तक के उपभोक्ताओं के मासिक बजट में बड़ा उछाल आना तय है।
ऊर्जा निगमों का तर्क: क्यों बढ़ानी पड़ रही हैं दरें?
ऊर्जा निगमों ने इस भारी बढ़ोतरी के पीछे कई वित्तीय कारणों का हवाला दिया है:
- बिजली खरीद की बढ़ती लागत: निगमों का कहना है कि बाहरी राज्यों और निजी क्षेत्रों से बिजली खरीदने की लागत में काफी इजाफा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए दरों में संशोधन जरूरी है।
- पुराना घाटा और बुनियादी ढांचा: पुराने वित्तीय घाटे को कम करने और प्रदेश में बिजली की लाइनों व ट्रांसफार्मर के सुदृढ़ीकरण (Infrastructure Upgrade) के लिए अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता बताई गई है।
- बढ़ती मांग: राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने के लिए महंगे दामों पर बिजली लेनी पड़ रही है।
जनसुनवाई: जनता रखेगी अपना पक्ष
आज होने वाली जनसुनवाई इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है:
- सीधा संवाद: जनसुनवाई में आम जनता, व्यापार मंडल, औद्योगिक संगठन और उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधि नियामक आयोग के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे।
- विरोध के स्वर: राज्य भर से उपभोक्ता संगठनों ने इस बढ़ोतरी का विरोध शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है और 18.5% की वृद्धि अनुचित है।
- निर्णय की प्रक्रिया: जनसुनवाई के दौरान मिले सुझावों और शिकायतों के आधार पर आयोग बिजली दरों के प्रस्ताव की समीक्षा करेगा। आयोग के पास यह अधिकार है कि वह प्रस्तावित बढ़ोतरी को कम कर दे या पूरी तरह खारिज कर दे।
उपभोक्ताओं पर संभावित असर
अगर 18.5 प्रतिशत की वृद्धि लागू होती है, तो इसका असर कुछ इस प्रकार होगा:
- घरेलू उपभोक्ता: मध्यमवर्गीय परिवारों के बिजली बिल में प्रति माह 300 से 700 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
- व्यावसायिक और औद्योगिक: होटलों, दुकानों और फैक्ट्रियों के लिए बिजली महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
- किसानों पर बोझ: नलकूप और कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली भी महंगी होने की आशंका है।





