देहरादून/हल्द्वानी (28 मार्च, 2026): उत्तराखंड में रसोई गैस (LPG) के बाद अब पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) का संकट भी गहराता जा रहा है। भले ही राज्य प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि तेल की कोई कमी नहीं है, लेकिन धरातल पर हालात बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं। शहर के पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार को तेल की किल्लत साफ दिखाई दी, जिससे आम जनता को भारी फजीहत झेलनी पड़ी।
पंपों पर तेल की किल्लत: बिक्री पर लिमिट और आपूर्ति ठप
शनिवार को शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों पर हालात बदले-बदले नजर आए और तेल की आपूर्ति बाधित होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा:
- बिक्री पर लिमिट: ट्रांसपोर्ट नगर स्थित भारत पेट्रोलियम (BPCL) के पेट्रोल पंप पर लोगों को पेट्रोल की बिक्री पर सीमा लगा दी गई। पंप प्रबंधन ने तेल की कमी को देखते हुए प्रत्येक उपभोक्ता को अधिकतम 300 रुपये तक का ही पेट्रोल देने का निर्णय लिया।
- पंप बंद: इसी तरह एचपी कंपनी (HPCL) वाले सतवाल पेट्रोल पंप पर शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पूरी तरह ठप रही। पंप पर तैनात कर्मचारी ने बताया कि कंपनी से ईंधन की आपूर्ति समय पर नहीं हुई है, जिसके कारण पंप को बंद करना पड़ा।
- उपभोक्ताओं की परेशानी: पेट्रोल पंपों पर तेल न मिलने या बिक्री पर लिमिट लगाए जाने से उपभोक्ताओं, विशेष रूप से दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई। कई लोगों को तेल के लिए एक पंप से दूसरे पंप तक भटकना पड़ा।
प्रशासन के दावों और हकीकत में फर्क: गहराता संकट
प्रशासन के आश्वासनों और पेट्रोल पंपों की वास्तविक स्थिति में स्पष्ट विरोधाभास है:
- प्रशासन का दावा: जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग लगातार यह दावा कर रहे हैं कि राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और तेल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
हकीकत: पेट्रोल पंपों पर तेल की किल्लत, बिक्री पर लिमिट और पंपों का बंद होना यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में कोई गंभीर समस्या है। तेल कंपनियों और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी भी संकट को बढ़ा रही है।





