देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए किए गए समझौतों को हकीकत में बदलने में जुटी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि ‘इन्वेस्टर समिट’ के दौरान हुए करारों में से ₹1.06 लाख करोड़ के प्रस्ताव अब धरातल पर उतर चुके हैं, यानी इन पर काम शुरू हो गया है। सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निवेश की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन साथ ही नौकरशाही को कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों को निवेशकों की समस्याओं का समाधान ‘प्रायोरिटी’ (प्राथमिकता) के आधार पर करना होगा।
निवेश की वर्तमान स्थिति: आंकड़ों की नजर से
दिसंबर 2023 में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के बाद से सरकार ने ‘ग्राउंडिंग’ (कार्यों की शुरुआत) पर विशेष ध्यान दिया है:
- कुल ग्राउंडिंग: अब तक ₹1 लाख 6 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर काम शुरू हो चुका है।
- प्रमुख क्षेत्र: निवेश का बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग, सौर ऊर्जा (Solar Energy), आयुष और वेलनेस, और पर्यटन क्षेत्र से आया है।
- रोजगार की उम्मीद: इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर राज्य के करीब 2 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री के अधिकारियों को कड़े निर्देश
बैठक के दौरान सीएम धामी ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लेकर अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए:
- अवरोधों का तत्काल समाधान: मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी निवेश परियोजना में भूमि हस्तांतरण, पर्यावरण क्लीयरेंस या बिजली कनेक्शन जैसी कोई बाधा आ रही है, तो उसे संबंधित विभाग के सचिव तुरंत सुलझाएं।
- फाइल कल्चर का अंत: सीएम ने निर्देश दिया कि निवेश से जुड़ी फाइलें विभागों के बीच नहीं घूमनी चाहिए। यदि किसी विभाग में फाइल अटकती है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
- निजी निगरानी: मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं हर 15 दिन में बड़े निवेश प्रस्तावों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
निवेशकों के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ की मजबूती
सरकार निवेश प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठा रही है:
- पोर्टल अपडेट: सिंगल विंडो पोर्टल को और अधिक उन्नत बनाया गया है ताकि निवेशक अपनी अर्जी का स्टेटस रियल-टाइम में देख सकें।
- जिला स्तर पर सेल: हर जिले में ‘इन्वेस्टमेंट सेल’ का गठन किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का निराकरण जिलाधिकारी स्तर पर ही हो सके।
पहाड़ी क्षेत्रों में निवेश पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विशेष रूप से कहा कि मैदानी जिलों (देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर) के साथ-साथ पहाड़ी जिलों में भी उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए सरकार जल्द ही अपनी नई औद्योगिक नीति के तहत पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन (Subsidies) की घोषणा कर सकती है।
“हमारा लक्ष्य केवल समझौते करना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारना है। ₹1.06 लाख करोड़ का निवेश शुरू होना इस बात का प्रमाण है कि उद्यमियों का उत्तराखंड पर भरोसा बढ़ा है। हम राज्य को देश का प्रमुख निवेश हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री





