देहरादून। उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित जनगणना के पहले चरण की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। जनगणना निदेशालय ने एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत प्रदेश के प्रथम नागरिक राज्यपाल और मुख्यमंत्री के आवासों से की जाएगी। 10 अप्रैल से शुरू होने वाले ‘स्वगणना’ (Self-Enumeration) अभियान में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के परिवारों का विवरण सबसे पहले दर्ज किया जाएगा।
10 अप्रैल से शुरू होगी ‘स्वगणना’ की प्रक्रिया
जनगणना का यह पहला चरण आधुनिक तकनीक पर आधारित है, जिसमें नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने की सुविधा दी गई है।
- डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ: आगामी 10 अप्रैल से आधिकारिक पोर्टल (https://se.census.gov.in) नागरिकों के लिए खोल दिया जाएगा।
- VIP स्वगणना: जनगणना निदेशालय की एक विशेष टीम 10 अप्रैल को राजभवन और मुख्यमंत्री आवास पहुँचेगी। वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पोर्टल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज करने में सहायता प्रदान की जाएगी। इसके पश्चात मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के घरों की स्वगणना की जाएगी।
दो चरणों में संपन्न होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान दो अलग-अलग चरणों और पद्धतियों के साथ आगे बढ़ेगा:
- स्वगणना (10 अप्रैल से): मकान सूचीकरण और गणना से ठीक 15 दिन पहले नागरिकों को स्वयं विवरण भरने का मौका दिया जाएगा। जो लोग तकनीक का उपयोग कर सकते हैं, वे पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- मकान सूचीकरण और गणना (25 अप्रैल से): दूसरे चरण के तहत प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने का काम शुरू करेंगे। यह कार्य 25 अप्रैल से पूरे प्रदेश में एक साथ संचालित किया जाएगा।
जनगणना निदेशालय की विशेष तैयारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जनगणना निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि वीआईपी हस्तियों से शुरुआत करने का उद्देश्य आम जनता के बीच जागरूकता फैलाना और उन्हें इस प्रक्रिया के प्रति प्रोत्साहित करना है।
“हम चाहते हैं कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्वगणना की पहल को देखकर आम नागरिक भी डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए प्रेरित हों। इससे न केवल डेटा की शुद्धता बढ़ेगी, बल्कि प्रगणकों का समय भी बचेगा।” — अधिकारी, जनगणना निदेशालय





