Friday, January 2, 2026

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उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट तेज: मकर संक्रांति के बाद ‘धामी सरकार 2.0’ का हो सकता है कायाकल्प

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में नए साल के आगाज के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। शासन और सत्ता के गलियारों में यह चर्चा आम है कि मकर संक्रांति के शुभ अवसर के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। इस संभावित विस्तार से भाजपा के कई वरिष्ठ और युवा विधायकों की किस्मत चमकने की उम्मीद है, जो लंबे समय से लाल बत्ती का इंतजार कर रहे हैं।

खाली पदों को भरने की तैयारी

वर्तमान में धामी मंत्रिमंडल में कई पद रिक्त चल रहे हैं, जिसके कारण मौजूदा मंत्रियों पर कामकाज का अतिरिक्त बोझ बना हुआ है।

  • पदों का गणित: नियमानुसार उत्तराखंड मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 12 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में रिक्त चल रहे पदों को भरने के लिए हाईकमान से हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
  • कार्यक्षमता में वृद्धि: नए मंत्रियों के शामिल होने से विभागों के कामकाज में तेजी आएगी और विकास कार्यों की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी।

किन विधायकों की खुल सकती है ‘लॉटरी’?

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई नाम चर्चाओं में हैं। माना जा रहा है कि पार्टी इस बार क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी।

  1. गढ़वाल और कुमाऊं का संतुलन: विस्तार में दोनों मंडलों के प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
  2. अनुभव और युवा जोश: अनुभवी विधायकों के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी टीम धामी में जगह मिल सकती है ताकि आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत दूसरी पंक्ति तैयार की जा सके।
  3. परफॉर्मेंस कार्ड: विधायकों द्वारा अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों और संगठन में उनकी सक्रियता को मंत्री पद की दावेदारी का मुख्य आधार माना जा रहा है।

हाईकमान की मुहर का इंतजार

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री धामी ने संभावित नामों की एक सूची पहले ही तैयार कर ली है। आगामी दिनों में दिल्ली दौरे के दौरान वे केंद्रीय नेतृत्व के साथ इस पर अंतिम चर्चा कर सकते हैं। मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही इस राजनीतिक प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।

दायित्वधारियों की भी आ सकती है सूची

कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ विभिन्न निगमों, परिषदों और समितियों में खाली पड़े अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पदों (दायित्वधारियों) पर भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे उन कार्यकर्ताओं और विधायकों को संतुष्ट किया जा सकेगा जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाएगी।

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