देहरादून (26 मार्च, 2026): उत्तराखंड में हड़ताल, बंद, दंगा और उग्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ‘उत्तराखंड लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली नियमावली’ को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस नई नियमावली के तहत, अब किसी भी प्रकार के उपद्रव में होने वाली क्षति की भरपाई सीधे तौर पर जिम्मेदार व्यक्तियों और आयोजन करने वाले संगठनों से की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देवभूमि की शांति भंग करने वालों को अब न केवल जेल जाना होगा, बल्कि उन्हें बाजार भाव के आधार पर हुए नुकसान का भारी हर्जाना भी भुगतना होगा।
कड़ा शिकंजा: पोस्टर लगेंगे और विज्ञापन का खर्च भी दोषी ही देगा
हल्द्वानी के बनभूलपुरा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए गृह विभाग ने इस नियमावली में कई कड़े प्रावधान शामिल किए हैं:
- वसूली और सार्वजनिक पोस्टर: यदि कोई दोषी पक्ष नुकसान की भरपाई करने से इनकार करता है या कन्नी काटता है, तो प्रशासन सार्वजनिक स्थलों पर उसके नाम और फोटो वाले पोस्टर चस्पा करेगा।
- अतिरिक्त आर्थिक दंड: इन पोस्टरों के छपवाने और विज्ञापन के प्रकाशन पर होने वाला सारा खर्च भी उसी दोषी व्यक्ति से वसूला जाएगा।
- बाजार दर पर गणना: चल संपत्ति के नुकसान का आकलन वर्तमान बाजार दरों के आधार पर किया जाएगा, ताकि सरकारी खजाने पर कोई बोझ न पड़े।
आयोजकों की जवाबदेही: अनुमति के साथ देना होगा शपथ-पत्र
कैबिनेट के निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव गोपन शैलेश बगौली ने बताया कि अब प्रदर्शनों के लिए नियम पूरी तरह बदल गए हैं:
- अनिवार्य अनुमति और वचन-पत्र: किसी भी कार्यक्रम या विरोध-प्रदर्शन के लिए अब पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ आयोजकों को एक शपथ-पत्र (Affidavit) देना होगा, जिसमें वे संभावित क्षति की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे।
- प्रतिबंधित सामग्री: प्रदर्शनों के दौरान हथियार, ज्वलनशील पदार्थ और खतरनाक रसायनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
- वीडियोग्राफी से पहचान: घटनाओं की पारदर्शी जांच के लिए अब हर थाने में अत्याधुनिक वीडियोग्राफी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे भीड़ में छिपे उपद्रवियों की पहचान करना और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
न्यायिक प्रक्रिया: दावा अधिकरण का गठन और सर्किल रेट से आकलन
क्षति के दावों के त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया गया है:
- दावा अधिकरण (Claims Tribunal): सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ‘दावा अधिकरण’ का गठन किया जाएगा। इसमें अपर आयुक्त और राजस्व सदस्य भी शामिल होंगे, जो साक्ष्यों का विश्लेषण करेंगे।
- सर्किल रेट से मूल्यांकन: भवनों और अचल संपत्तियों को पहुंचाई गई क्षति का आकलन सर्किल रेट और निर्माण की वर्तमान स्थिति के आधार पर होगा।
- विशेष संस्थानों पर अतिरिक्त जुर्माना: यदि उपद्रवी अस्पतालों, सरकारी संस्थानों या ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उन पर सामान्य से कहीं अधिक अतिरिक्त क्षतिपूर्ति (Punitive Damages) लगाई जाएगी।





