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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा कानून में संशोधन की तैयारी, धार्मिक पाठ्यक्रम के लिए शिक्षा परिषद की मंजूरी की बाध्यता होगी खत्म

देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी की है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित सत्र के दौरान सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक, 2026 सदन में पेश किया। इसके तहत धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम लागू करने या उसमें बदलाव करने के लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की मंजूरी लेने की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव है। 

प्राधिकरण को मिलेगा पाठ्यक्रम तय करने का अधिकार

वर्ष 2025 में लागू उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम लागू करने से पहले विद्यालयी शिक्षा परिषद से अनुमोदन लेना आवश्यक था। प्रस्तावित संशोधन में अधिनियम की धारा 12 की उपधारा 3 से परिषद की मंजूरी संबंधी शब्द हटाने की व्यवस्था की गई है।

संशोधन लागू होने पर धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार करने, उसमें बदलाव करने और उसे लागू करने का अधिकार राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के स्तर पर रहेगा। इससे मदरसों सहित अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। 

पाठ्यक्रम तैयार, मंजूरी की प्रक्रिया में आ रही थी बाधा

राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने विभिन्न धर्मों के जानकारों और धर्मगुरुओं से विचार-विमर्श के बाद धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार किया है। हालांकि, विद्यालयी शिक्षा परिषद से अनुमोदन की प्रक्रिया के कारण इसे लागू करने में देरी हो रही थी। सरकार ने इसी बाधा को दूर करने के लिए संशोधन विधेयक पेश किया है।

प्रस्तावित पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली प्रमुख हस्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल करने की योजना भी बताई गई है। 

कार्रवाई से पहले संस्थानों को मिलेगा सुनवाई का अवसर

संशोधन विधेयक में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करने का प्रस्ताव है। यदि किसी संस्थान में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दंड या जुर्माना लगाने से पहले संस्थान के संचालक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। 

विधेयक पारित होने के बाद लागू होगी व्यवस्था

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव से पाठ्यक्रम तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया सरल होगी। हालांकि, विधेयक पेश होने के बाद इसे विधानसभा से पारित कराने और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता होगी। इसके बाद ही संशोधित प्रावधान लागू हो सकेंगे।

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