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उत्तराखंड: मदरसों को धार्मिक शिक्षा के लिए अब नए सिरे से लेनी होगी मान्यता; अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तैयार कर रहा है विशेष ‘धार्मिक कोर्स’

देहरादून: उत्तराखंड राज्य सरकार ने प्रदेश के मदरसों में दी जा रही धार्मिक शिक्षा के ढांचे और गुणवत्ता में सुधार के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब राज्य के सभी मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के लिए आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नए सिरे से मान्यता लेनी होगी। यह मान्यता ‘राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ (State Minority Education Authority) द्वारा जारी की जाएगी और इसकी प्रक्रिया को पारदर्शी व सुव्यवस्थित बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।

धार्मिक शिक्षा के लिए प्राधिकरण का ‘विशेषाधिकार’ और नई शर्त

मदरसों को धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के लिए मान्यता केवल इसी शर्त पर दी जाएगी कि उन्हें प्राधिकरण की ओर से तैयार किया गया ‘विशेष धार्मिक कोर्स’ (Special Religious Course) ही पढ़ाना होगा। इसका अर्थ है कि मदरसे अब अपनी मर्जी से कोई भी धार्मिक पाठ्यपुस्तक या पाठ्यक्रम नहीं चला सकेंगे। प्राधिकरण इस कोर्स को तैयार करने के लिए इस्लामी विद्वानों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ परामर्श कर रहा है, ताकि यह कोर्स आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक मूल्यों को भी संतुलित तरीके से प्रस्तुत करे।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी नई व्यवस्था

यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पूर्णतः प्रभावी हो जाएगी। मदरसों को इस समय सीमा से पहले प्राधिकरण के पास मान्यता के लिए आवेदन करना होगा और उनके बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता, और प्रस्तावित धार्मिक कोर्स की जाँच के बाद ही मान्यता जारी की जाएगी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जिन मदरसों के पास पहले से मान्यता है, उन्हें भी नए सत्र से पहले इस नई प्रक्रिया से गुजरना होगा और उनके कोर्स को प्राधिकरण की मंजूरी लेनी होगी।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने का प्रयास

इस पहल का मुख्य उद्देश्य मदरसों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और छात्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने के लिए तैयार करना है। प्राधिकरण का मानना है कि एक संतुलित धार्मिक कोर्स के साथ-साथ छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए। इससे मदरसे के छात्र न केवल अपने धर्म के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं और रोज़गार के अवसरों के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।

उत्तराखंड सरकार का यह कदम राज्य के मदरसों में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाने और मुस्लिम समुदाय के बच्चों को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

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