देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य को देश का सबसे बड़ा ‘पर्यटन हब’ बनाने की दिशा में अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने सरकार के आगामी रोडमैप को साझा करते हुए कहा कि देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और कृषि संस्कृति का मेल राज्य की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देगा। उन्होंने बताया कि सरकार केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित न रहकर अब एग्रो-टूरिज्म (कृषि पर्यटन), साहसिक खेल और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना और पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकना है।
एग्रो-टूरिज्म पर विशेष जोर: खेतों में भी आएंगे पर्यटक
कृषि मंत्री ने रेखांकित किया कि उत्तराखंड की पारंपरिक खेती और बागवानी को पर्यटन से जोड़ा जाएगा:
- सेब और चाय बागान: हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड के सेब के बगीचों और चाय बागानों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक स्वयं फल तोड़ने और खेती का अनुभव ले सकेंगे।
- जैविक उत्पाद: पर्यटकों को उत्तराखंड के शुद्ध जैविक (Organic) उत्पादों, जैसे मंडुआ, झंगोरा और लाल चावल से परिचित कराया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी।
होमस्टे योजना: घर-घर पहुंचेगा रोजगार
सरकार के रोडमैप में ‘होमस्टे’ योजना को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है:
- सांस्कृतिक अनुभव: पर्यटकों को फाइव-स्टार होटलों के बजाय पहाड़ों के पारंपरिक घरों में रुकने और पहाड़ी खान-पान का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- आर्थिक मजबूती: कृषि मंत्री ने बताया कि अब तक हजारों होमस्टे पंजीकृत किए जा चुके हैं, और सरकार इन्हें बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण दे रही है।
- पलायन पर प्रहार: जब गांव के युवाओं को अपने ही घर में रोजगार मिलेगा, तो वे शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का विस्तार
पर्यटन हब बनने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार कर रही है:
- सड़क और रेल मार्ग: चारधाम ऑल-वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन इस रोडमैप का आधार हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच को सुगम बनाएंगे।
- साहसिक पर्यटन: टिहरी झील और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग और ट्रैकिंग के नए केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
- नया पर्यटन स्थल विकास: मसूरी और नैनीताल जैसे पुराने केंद्रों के दबाव को कम करने के लिए सरकार कई नए ‘ऑफ-बीट’ डेस्टिनेशन्स को विकसित कर रही है।





