देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने आगामी ‘जनगणना 2027’ को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए अपनी कमर कस ली है। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने पूरे प्रदेश को 30,000 छोटे हिस्सों (इन्युमरेशन ब्लॉक्स) में बांटने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी मास्टरप्लान का उद्देश्य राज्य के हर दुर्गम गांव और सुदूर बस्तियों तक पहुँच सुनिश्चित करना है, ताकि जनसंख्या का सटीक डेटा प्राप्त किया जा सके। यह जनगणना न केवल आबादी के आंकड़े जुटाएगी, बल्कि राज्य की भविष्य की विकास योजनाओं और संसाधनों के बंटवारे का आधार भी बनेगी।
30 हजार हिस्सों में विभाजन: क्यों और कैसे?
जनगणना प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाई है:
- सूक्ष्म प्रबंधन: प्रत्येक ब्लॉक (हिस्से) के लिए एक निश्चित संख्या में परिवारों का चयन किया जाएगा, जिससे गणना करने वाले कर्मियों (Enumerators) पर काम का बोझ कम रहे और त्रुटि की संभावना न के बराबर हो।
- दुर्गम क्षेत्रों पर फोकस: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में बिखरी हुई आबादी को देखते हुए विशेष ब्लॉक बनाए गए हैं, ताकि ऊँचाई पर स्थित गांवों का कोई भी परिवार छूट न जाए।
- मैपिंग का काम शुरू: राजस्व विभाग और सांख्यिकी निदेशालय ने डिजिटल मैपिंग के जरिए इन 30 हजार हिस्सों का सीमांकन शुरू कर दिया है।
डिजिटल जनगणना: तकनीक का होगा भरपूर इस्तेमाल
2027 की इस जनगणना में पहली बार तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रयोग देखने को मिलेगा:
- मोबाइल ऐप और पोर्टल: गणनाकर्मी घर-घर जाकर डेटा को सीधे मोबाइल ऐप के जरिए क्लाउड सर्वर पर अपलोड करेंगे। इससे कागज का काम कम होगा और डेटा प्रोसेसिंग की गति तेज होगी।
- सेल्फ इन्युमरेशन: मास्टरप्लान के तहत नागरिकों को ‘सेल्फ इन्युमरेशन’ (स्वयं गणना) का विकल्प भी दिया जा सकता है, जहाँ लोग ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।
- जीपीएस ट्रैकिंग: गणना कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस (GPS) का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह पुष्टि हो सके कि कर्मी वास्तव में मौके पर पहुँचे हैं।
मास्टरप्लान के मुख्य उद्देश्य
सरकार इस जनगणना के जरिए केवल संख्या ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े भी जुटाएगी:
- प्रवासन (Migration) का डेटा: उत्तराखंड के लिए पलायन एक बड़ी चुनौती है। जनगणना 2027 के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पिछले एक दशक में कितने लोग गांवों से शहरों या अन्य राज्यों की ओर गए हैं।
- संसाधनों का नियोजन: पेयजल, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की भविष्य की जरूरतों को समझने के लिए यह डेटा मील का पत्थर साबित होगा।
- सामाजिक-आर्थिक स्थिति: परिवारों की आय, शिक्षा का स्तर और रोजगार की स्थिति का भी विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा।





