हरादून। उत्तराखंड में व्यावसायिक वाहन स्वामियों के लिए आने वाले दिन बड़ी मुसीबत लेकर आ सकते हैं। केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में प्रदेश भर में संचालित मैनुअल फिटनेस सेंटर बंद कर दिए गए हैं। इस निर्णय का सीधा असर राज्य के लगभग चार लाख कॉमर्शियल यात्री वाहनों पर पड़ने जा रहा है, जिससे परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है नया नियम?
परिवहन विभाग के नए नियमों के अनुसार, अब व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) पर ही की जाएगी। अब तक एआरटीओ (ARTO) कार्यालयों में मैन्युअल तरीके से वाहनों की फिटनेस जांच की जाती थी, जिसे अब पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि मशीनीकृत जांच से वाहनों की फिटनेस अधिक सटीक होगी और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
वाहन स्वामियों के सामने चुनौतियां
मैनुअल सेंटरों के बंद होने से वाहन स्वामियों को कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- लंबी कतारें और दूरी: राज्य में वर्तमान में ऑटोमेटेड सेंटरों की संख्या बेहद कम है। पहाड़ों से वाहनों को फिटनेस के लिए मैदानी क्षेत्रों में बने सेंटरों तक लाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों का भारी नुकसान हो रहा है।
- फिटनेस फेल होने का डर: पुराने वाहनों के लिए ऑटोमेटेड मशीनों के कड़े मानकों को पास करना बड़ी चुनौती है। जरा सी तकनीकी खामी होने पर भी मशीन वाहन को अनफिट घोषित कर देती है।
- आर्थिक बोझ: मैनुअल जांच की तुलना में ऑटोमेटेड सेंटर की फीस और वहां जाने-आने का खर्च वाहन स्वामियों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
पर्यटन और चारधाम यात्रा पर असर की आशंका
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर आधारित है। राज्य में बसों, टैक्सियों और मैक्स वाहनों की बड़ी संख्या है। यदि इन चार लाख वाहनों की फिटनेस समय पर नहीं हो पाती है, तो आगामी यात्रा सीजन और दैनिक परिवहन सेवाओं पर इसका व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
परिवहन संघों में आक्रोश
विभिन्न परिवहन यूनियनों ने सरकार के इस कदम का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक हर जिले में पर्याप्त संख्या में ऑटोमेटेड सेंटर नहीं खुल जाते, तब तक मैनुअल व्यवस्था को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए था। वाहन स्वामियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो वे चक्का जाम जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।





