Top 5 This Week

Related Posts

उत्तराखंड के वनों को मिलेगा जापान का साथ: 1500 करोड़ की ‘जायका’ परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी; 10 वर्षों तक चलेगा संरक्षण अभियान

देहरादून। उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और वन संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए जापान की ओर से एक बड़ी मदद की घोषणा की गई है। जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (JICA – जायका) के वित्तपोषण से राज्य में ‘उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना’ के दूसरे चरण को शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना अगले 10 वर्षों तक प्रदेश के वनों के संरक्षण, वनीकरण और स्थानीय समुदायों की आजीविका सुधारने की दिशा में काम करेगी।

मुख्यमंत्री और जायका प्रतिनिधि के बीच उच्च स्तरीय वार्ता

शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके सरकारी आवास पर जायका के भारत में मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने मुलाकात की। इस बैठक में परियोजना के दूसरे चरण के कार्यान्वयन और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

  • सहयोग का आश्वासन: टेकुची टकुरो ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि जायका दूसरे चरण के लिए उत्तराखंड को हरसंभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा।
  • वन मंत्री से मुलाकात: प्रतिनिधिमंडल ने इसके पश्चात वन मंत्री सुबोध उनियाल से भी मुलाकात कर परियोजना के लक्ष्यों और समयसीमा पर चर्चा की। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से वनों पर निर्भर ग्रामीण आबादी को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

परियोजना का इतिहास: 2014 से जारी है सफर

उत्तराखंड में वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए जायका वित्तपोषित पहली परियोजना वर्ष 2014 में शुरू की गई थी।

  • प्रथम चरण का बजट: शुरुआत में इस परियोजना की लागत 807 करोड़ रुपये थी।
  • अवधि विस्तार: कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई बाधाओं के चलते इस परियोजना की समयसीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त, 2026 कर दिया गया था। अब प्रथम चरण के पूरा होने से पहले ही दूसरे चरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है ताकि संरक्षण के कार्यों में निरंतरता बनी रहे।

द्वितीय चरण का मुख्य फोकस और लाभ

1500 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम निवेश से प्रदेश के पर्यावरण तंत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है।

  • पारिस्थितिकी संतुलन: दूसरे चरण के तहत वनाग्नि नियंत्रण, मृदा संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • समुदायों का विकास: वन पंचायतों को सशक्त बनाना और ईको-टूरिज्म के जरिए ग्रामीणों की आय बढ़ाना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
  • वन क्षेत्र में विस्तार: प्रदेश के खाली पड़े वन क्षेत्रों में जापानी तकनीक और स्थानीय प्रजातियों के मेल से सघन वनीकरण किया जाएगा।

Popular Articles