देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून अपनी सुहावनी वादियों और सुकून के लिए जानी जाती थी, लेकिन आज इसकी पहचान बदलती जा रही है। दून की सड़कें अब पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि घंटों लंबे ट्रैफिक जाम के लिए चर्चा में हैं। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर गलियों तक, यातायात की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय निवासी अब इसे ‘राजधानी’ के बजाय ‘जाम की राजधानी’ कहने लगे हैं। सुबह स्कूल और दफ्तर का समय हो या शाम की व्यस्तता, शहर की हर मुख्य सड़क एक विशाल पार्किंग लॉट में तब्दील नजर आती है।
जाम के मुख्य कारण: क्यों थमी दून की रफ्तार?
जानकारों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, शहर की इस दुर्दशा के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- अधूरी और बेतरतीब खुदाई: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, सीवरेज लाइन और गैस पाइपलाइन बिछाने के नाम पर शहर की लगभग हर मुख्य सड़क खुदी हुई है। खुदाई के बाद सड़कों की समय पर मरम्मत न होने से रास्ते संकरे हो गए हैं।
- अतिक्रमण की समस्या: सड़कों के किनारे अवैध पार्किंग और व्यापारियों द्वारा किए गए अतिक्रमण ने पैदल चलने वालों और वाहनों के लिए जगह कम कर दी है।
- वाहनों का भारी दबाव: राजधानी बनने के बाद देहरादून में वाहनों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है, जबकि सड़कों का विस्तार उस अनुपात में नहीं हो पाया है।
इन इलाकों में बुरा हाल: ‘हॉटस्पॉट’ बने ये चौक
शहर के कुछ इलाके ऐसे हैं जहाँ से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है:
- आईएसबीटी (ISBT) और सहारनपुर रोड: बाहरी राज्यों से आने वाली बसों और खुदी हुई सड़कों के कारण यहाँ दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
- राजपुर रोड और चकराता रोड: शहर के वीआईपी और व्यापारिक क्षेत्र होने के कारण यहाँ वाहनों का दबाव सबसे अधिक रहता है।
- घंटाघर और सर्वे चौक: यहाँ ई-रिक्शा और ऑटो की अनियंत्रित आवाजाही ने ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
आम जनता की परेशानी: समय और ईंधन की बर्बादी
जाम का असर केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं:
- इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित: एंबुलेंस का जाम में फंसना अब आम बात हो गई है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
- बढ़ता प्रदूषण: घंटों इंजन चालू रहने से शहर के वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के ग्राफ में भारी उछाल आया है।
- मानसिक तनाव: जाम में फंसने के कारण कामकाजी लोगों और छात्रों के बीच मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।





