लखनऊ: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। राज्य की बिजली कंपनियों (UPPCL) ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों में औसतन 18 से 20 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के समक्ष पेश किया है। आयोग ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए अब मार्च 2026 में सार्वजनिक जनसुनवाई करने का निर्णय लिया है। इस जनसुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि प्रदेश की जनता को कितनी महंगी बिजली मिलेगी।
बिजली कंपनियों का तर्क: क्यों चाहिए इजाफा?
बिजली कंपनियों ने अपने घाटे की भरपाई और परिचालन लागत (Operational Cost) में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए दरों को बढ़ाने की मांग की है:
- राजस्व घाटा: कंपनियों का दावा है कि वर्तमान दरों पर उन्हें हजारों करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हो रहा है।
- कोयले और उत्पादन की लागत: वैश्विक और घरेलू स्तर पर कोयले के दामों में वृद्धि और बिजली उत्पादन इकाइयों के बढ़ते खर्च को इस बढ़ोतरी का मुख्य आधार बताया गया है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: लाइनों के रखरखाव और स्मार्ट मीटरिंग जैसी योजनाओं के लिए कंपनियों को अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है।
उपभोक्ता श्रेणियों पर संभावित असर
प्रस्तावित वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है:
- घरेलू उपभोक्ता (LMV-1): मध्यम वर्गीय परिवारों के बिल में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
- ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी फिक्स्ड चार्ज और प्रति यूनिट दर बढ़ाने का प्रस्ताव है।
- औद्योगिक इकाइयां: उद्योगों के लिए बिजली महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
मार्च में होगी जनसुनवाई: जनता रख सकेगी अपना पक्ष
नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी निर्णय थोपने से पहले सभी पक्षों की राय ली जाएगी:
- आपत्तियां आमंत्रित: उपभोक्ता अगले कुछ हफ्तों में बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव आयोग को भेज सकते हैं।
- मंडलवार सुनवाई: मार्च के पहले सप्ताह से प्रदेश के प्रमुख मंडलों (जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ) में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
- अंतिम फैसला: जनसुनवाई पूरी होने के बाद आयोग अप्रैल या मई के महीने में नई टैरिफ दरों का एलान कर सकता है।





