लाहौर। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा और घातक असर अब पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण पाकिस्तान सरकार ने ईंधन के दामों में ऐतिहासिक वृद्धि की है, जिसके विरोध में बुधवार को पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में भारी जन-आक्रोश देखने को मिला। ‘अवामी रिक्शा यूनियन’ के नेतृत्व में सैकड़ों ऑटो रिक्शा चालकों ने चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
आसमान छूती कीमतें: ₹520 पहुँचा डीजल का दाम
पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें अब आम आदमी की पहुँच से पूरी तरह बाहर होती जा रही हैं। ऊर्जा संकट और मुद्रास्फीति के कारण कीमतों ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
- ईंधन के नए दाम: लाहौर और आसपास के इलाकों में पेट्रोल की कीमत 458 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 520 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गई है।
- रसोई गैस का संकट: न केवल वाहन ईंधन, बल्कि एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भी कई सौ रुपये का इजाफा किया गया है, जिससे घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
रोजी-रोटी के संकट में ऑटो रिक्शा चालक
ईंधन की कीमतों में हुई इस वृद्धि ने सबसे बड़ा प्रहार परिवहन क्षेत्र और दिहाड़ी कमाने वाले चालकों पर किया है।
- आय में भारी गिरावट: प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि पेट्रोल और एलपीजी के महंगे होने से उनकी दिनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा केवल ईंधन भरवाने में ही निकल जाता है। सवारी न मिलने और बढ़े हुए किराए के कारण आम जनता भी रिक्शा का उपयोग कम कर रही है।
- अवामी रिक्शा यूनियन का विरोध: यूनियन के सदस्यों ने लाहौर की मुख्य सड़कों पर रिक्शा खड़ा कर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न केवल कीमतें बढ़ा रही है, बल्कि बाजार में ईंधन की कालाबाजारी (Black Marketing) को रोकने में भी पूरी तरह विफल रही है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें
सैकड़ों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी समस्याएँ रखते हुए तत्काल राहत की मांग की है:
- ईंधन की कीमतों में की गई हालिया वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए।
- ऑटो रिक्शा चालकों के लिए विशेष सब्सिडी वाले ईंधन की व्यवस्था की जाए।
- एलपीजी और पेट्रोल की कालाबाजारी करने वाले माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।




