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ईरान युद्ध के बीच भारत की रूस पर निर्भरता बढ़ी: मार्च में रूसी कच्चे तेल की खरीद में 90% का रिकॉर्ड उछाल; पश्चिम एशिया से आपूर्ति ठप, कुल तेल आयात में 15% की गिरावट

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और ईरान व इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद में एक ऐतिहासिक और रिकॉर्ड वृद्धि की है। मार्च 2026 में, भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद फरवरी की तुलना में लगभग 90% बढ़ गई, जो देश के तेल आयात में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव दर्शाता है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट के कारण भारत का कुल कच्चे तेल का आयात लगभग 15% घट गया। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में रुकावट के कारण भारत के एलपीजी (LPG) और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) आयात में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे देश को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ी। रूसी तेल की खरीद अप्रैल में भी जारी रहने की उम्मीद है, जबकि भारत वेनेजुएला और ईरान से भी तेल आयात करने की संभावनाएँ तलाश रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट: भारत के एलपीजी और प्राकृतिक गैस आयात में भारी गिरावट

पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण भारत के ऊर्जा आयात पर गंभीर असर पड़ा है। मार्च में, भारत के एलपीजी आयात में लगभग 40% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे देश में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, प्राकृतिक गैस की खेप में भी कमी दर्ज की गई, जिससे देश के औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है, और इसमें रुकावट भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत सरकार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है और वैकल्पिक स्रोतों और परिवहन मार्गों की तलाश के लिए कड़े प्रयास जारी रखे हैं।

रूस से रिकॉर्ड तेल खरीद: भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने रूस से रिकॉर्ड तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत किया है। रूस भारत का एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, और मार्च में रिकॉर्ड खरीद ने इस साझेदारी को और अधिक मज़बूत किया है। रूसी तेल भारत के लिए एक सस्ता और विश्वसनीय विकल्प साबित हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। भारत ने रूस से तेल खरीदकर न केवल अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा किया है, बल्कि पश्चिम एशिया संकट के कारण होने वाली आपूर्ति में रुकावट के जोखिम को भी कम किया है। यह कदम भारत की विदेश नीति और ऊर्जा कूटनीति के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

अप्रैल में भी जारी रहेगी रूसी तेल की खरीद: वैकल्पिक स्रोतों की तलाश जारी

रिटोइया (Ritoiya) के अनुसार, भारत की रूस से तेल खरीद अप्रैल में भी जारी रहने की उम्मीद है, और देश रूसी तेल का एक प्रमुख आयातक बना रहेगा। इसके अलावा, भारत अप्रैल से वेनेजुएला (Venezuela) और ईरान (Iran) से भी तेल आयात करने की संभावनाएँ तलाश रहा है, जिससे देश के तेल आपूर्ति में और अधिक विविधता और सुरक्षा आएगी। वेनेजुएला और ईरान भारत के लिए अन्य महत्त्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ता हो सकते हैं, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक मज़बूत करने में मदद करेंगे। भारत सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश और तेल आपूर्ति में विविधता लाने के लिए कड़े प्रयास जारी रखे हैं, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सके।

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