नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी विनाशकारी युद्ध के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में देश को संबोधित किया। विदेश मंत्री ने क्षेत्र की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए खुलासा किया कि ईरान में जारी अस्थिरता और नेतृत्व के संकट के कारण वहां की लीडरशिप से संपर्क साधना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं और सरकार का पूरा ध्यान वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा पर केंद्रित है।
नेतृत्व का संकट और दूतावास की सक्रियता
विदेश मंत्री ने ईरान में जमीनी हकीकत और भारतीय मिशन की स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की:
- लीडरशिप से संपर्क में बाधा: जयशंकर ने बताया कि ईरान में मौजूदा उथल-पुथल के कारण वहां के शीर्ष नेतृत्व से संचार स्थापित करना मुश्किल हो गया है।
- हाई अलर्ट पर मिशन: तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और उसे ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है। दूतावास लगातार स्थानीय भारतीय समुदाय के संपर्क में है।
- छात्रों और व्यापारियों की मदद: भारतीय दूतावास ने अब तक तेहरान में रह रहे कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है। इसके अलावा, व्यापार के सिलसिले में ईरान गए भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में सहायता प्रदान की जा रही है।
एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा का सवाल
विदेश मंत्री ने इस संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को रेखांकित किया:
- बड़ी भारतीय आबादी: जयशंकर ने सदन को बताया कि खाड़ी देशों में एक करोड़ से अधिक भारतीय निवास करते हैं। इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- ऊर्जा सुरक्षा पर संकट: उन्होंने चेतावनी दी कि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी तेल और गैस आपूर्ति के लिए काफी हद तक इन्हीं देशों पर निर्भर है।
- फैलता संघर्ष: विदेश मंत्री के अनुसार, युद्ध अब अन्य देशों में भी फैल गया है, जिससे भारी तबाही मच रही है और सुरक्षा स्थिति बदतर होती जा रही है।
‘संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान’
विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच एस. जयशंकर ने भारत के रुख को स्पष्ट किया:
- संयम की अपील: भारत ने 20 फरवरी को ही आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया था।
- कूटनीतिक प्रयास: विदेश मंत्री ने दोहराया कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। तनाव कम करने के लिए केवल संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। भारत इस अस्थिरता को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रमुख देशों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है।





