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ईरान की खुली चुनौती: ‘हमारे द्वीपों पर हमला हुआ तो खून से लाल होगी फारस की खाड़ी’; संसद अध्यक्ष की भीषण युद्ध की चेतावनी

तेहरान (12 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपनी संप्रभुता को लेकर अब तक की सबसे कठोर चेतावनी जारी की है। ईरानी संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने कड़े शब्दों में कहा है कि यदि ईरान के रणनीतिक द्वीपों या उसकी क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी प्रकार का हमला होता है, तो उसका जवाब इतना भीषण होगा कि पूरी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) खून से लाल हो जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान के संबंध युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं और खाड़ी क्षेत्र में विदेशी नौसैनिक जहाजों की हलचल तेज हो गई है।

रणनीतिक द्वीपों पर ‘रेड लाइन’: तेहरान का रुख

ईरानी संसद अध्यक्ष का यह बयान विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित रणनीतिक द्वीपों— अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब— को लेकर जारी विवाद और उन पर मंडराते संभावित खतरों के संदर्भ में देखा जा रहा है:

  • संप्रभुता का मुद्दा: कलिबाफ ने स्पष्ट किया कि इन द्वीपों पर ईरान का अधिकार ‘अपरक्राम्य’ (Non-negotiable) है और इनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ ईरान के अस्तित्व पर हमला मानी जाएगी।
  • दुश्मनों को चेतावनी: उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को आगाह किया कि वे ईरान की रक्षात्मक शक्ति को परखने की भूल न करें।
  • मिसाइल शक्ति का जिक्र: बयान में संकेत दिया गया कि ईरान की ‘हजारों मिसाइलें’ खाड़ी में मौजूद किसी भी विदेशी बेड़े को पल भर में राख करने के लिए तैयार हैं।

फारस की खाड़ी बनेगी ‘मौत का जाल’

ईरान ने इस बार केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक तेवर अपनाए हैं। संसद अध्यक्ष के भाषण के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

  1. क्षेत्रीय असुरक्षा: कलिबाफ ने कहा कि यदि ईरान असुरक्षित महसूस करेगा, तो वह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल देगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है।
  2. ऐतिहासिक संदर्भ: उन्होंने याद दिलाया कि ईरान ने हमेशा अपनी सीमाओं की रक्षा की है और इस बार किसी भी ‘आक्रामकता’ का अंत दुश्मन के विनाश के साथ होगा।
  3. घरेलू एकता: उन्होंने देशवासियों और सेना को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी ईरानी सरकार और सेना इस मुद्दे पर एकमत है और किसी भी बलिदान के लिए तैयार है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहराया संकट

ईरान की इस सीधी चेतावनी ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है:

  • तेल की कीमतें: होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस क्षेत्र में युद्ध की धमकी मात्र से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलने लगी हैं।
  • नौसैनिक जमावड़ा: ईरान के इस कड़े रुख के बाद अमेरिका ने अपने पांचवें बेड़े (5th Fleet) को हाई अलर्ट पर रखा है, जिससे फारस की खाड़ी में आमने-सामने की जंग का खतरा बढ़ गया है।

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