देहरादून: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर उत्तराखंड के उन हजारों परिवारों पर भी पड़ा है, जिनके सदस्य रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से मिडिल ईस्ट के देशों में रह रहे हैं। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सतर्कता बढ़ाते हुए प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देश पर राज्य सरकार ने एक विशेष स्टेट हेल्प डेस्क को सक्रिय किया है। इस हेल्प डेस्क के माध्यम से मिडिल ईस्ट में रह रहे उत्तराखंड के नागरिकों और उनके परिजनों को आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार ने गृह विभाग और जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से इजरायल, ईरान और आसपास के देशों में रह रहे नागरिकों का डेटाबेस तैयार करें। इसके साथ ही परिजनों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल संपर्क स्थापित किया जा सके।
राज्य सरकार ने इस मामले में Ministry of External Affairs के साथ समन्वय भी स्थापित किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव स्तर पर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वहां रह रहे नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया तेज की जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य के नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने प्रभावित परिवारों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार और भारतीय दूतावासों के संपर्क में है और हर नागरिक की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अनुमान के अनुसार उत्तराखंड के पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और देहरादून सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग इजरायल में कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि ईरान में भी कई पेशेवर और छात्र मौजूद हैं। युद्ध जैसी स्थिति के बीच इन परिवारों में स्वाभाविक रूप से चिंता का माहौल है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे केंद्र सरकार द्वारा जारी यात्रा एडवाइजरी का पालन करें और फिलहाल तनावग्रस्त क्षेत्रों की यात्रा से बचें। हेल्प डेस्क के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विदेशों में रह रहे लोगों का अपने परिजनों से संपर्क बना रहे और उन्हें आवश्यक सहायता मिलती रहे।





