इथियोपिया में अत्यंत घातक मारबर्ग वायरस के फैलाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अब तक कुल नौ मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। वायरस की पुष्टि होते ही स्थानीय प्रशासन से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों तक सभी सक्रिय हो गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी तेजी से हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं।
पहले मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
मारबर्ग वायरस के शुरुआती लक्षण इबोला से मिलते-जुलते हैं और इसके संक्रमण दर तेज होने के कारण इसे उच्च जोखिम श्रेणी में रखा जाता है। इथियोपिया में सामने आए शुरुआती मामलों ने स्वास्थ्य तंत्र को तुरंत अलर्ट कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण के स्रोत की पहचान और रोगियों के संपर्क में आए लोगों की खोज के लिए त्वरित जांच अभियान चलाया जा रहा है।
WHO की आपात कार्रवाई
स्वास्थ्य संकट के बढ़ते खतरे को देखते हुए WHO ने इथियोपिया को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ मेडिकल टीमों को मौके पर भेजने की घोषणा की है। संगठन ने प्रयोगशाला परीक्षण सुविधा को मजबूत करने, संदिग्ध मामलों की निगरानी तेज करने और प्रभावित क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमित स्वास्थ्य ढांचे वाले क्षेत्रों में वायरस के फैलने का जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए रोकथाम के लिए कठोर निगरानी और सामुदायिक जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं।
मामलों की संख्या बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि मारबर्ग वायरस मानव-से-मानव में तेजी से फैल सकता है, इसलिए शुरुआती चरण में संक्रमण की सटीक पहचान और संपर्क ट्रेसिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इथियोपिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में मामलों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई जिलों में संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट मिल रही हैं। सभी जिलों को अलर्ट पर रखा गया है।
स्थानीय प्रशासन की तैयारी तेज
वायरस की पुष्टि के बाद स्थानीय स्तर पर आइसोलेशन केंद्र बढ़ाए गए हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वायरस से जुड़े मामलों की तुरंत रिपोर्ट करें और किसी भी संदिग्ध लक्षण वाले मरीज को आइसोलेशन में रखें।
मारबर्ग वायरस कितना खतरनाक
मारबर्ग वायरस रोग की मृत्यु दर बेहद ऊंची मानी जाती है, जो परिस्थितियों के आधार पर 24% से 88% तक देखी गई है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, उल्टी, दस्त और बाद के चरण में आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। इस वायरस के लिए अभी तक कोई विशेष उपचार या लाइसेंस प्राप्त टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए शुरुआती पहचान और सपोर्टिव केयर ही उपचार का मुख्य आधार है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
इथियोपिया में यह संक्रमण सामने आने के बाद अफ्रीकी क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। WHO ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सहयोग की अपील की है, ताकि वायरस को सीमित क्षेत्र तक नियंत्रित किया जा सके और इसके व्यापक प्रसार को रोका जा सके।





