Monday, February 23, 2026

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‘इजरायल को पश्चिम एशिया में अपनी सीमाओं के विस्तार का पूरा अधिकार’: अमेरिकी राजदूत के बयान से भड़का तनाव; अरब देशों ने जताई कड़ी आपत्ति

यरूशलेम/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। राजदूत ने एक साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि इजरायल को अपनी सुरक्षा और ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए पश्चिम एशिया में अपनी सीमाओं का विस्तार करने का अधिकार है। इस बयान को अमेरिका की दशकों पुरानी विदेश नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे फिलिस्तीन समर्थकों और अरब देशों के बीच भारी रोष व्याप्त हो गया है।

राजदूत के बयान के मुख्य बिंदु

अमेरिकी राजदूत ने इजरायल के समर्थन में तर्क देते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • सुरक्षा का अधिकार: उन्होंने कहा कि इजरायल लगातार चारों ओर से खतरों से घिरा हुआ है। ऐसे में अपनी रक्षा के लिए उसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण बढ़ाने और अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने का संप्रभु अधिकार है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: राजदूत ने यह भी संकेत दिया कि इजरायल के पास कुछ क्षेत्रों पर ऐतिहासिक दावे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
  • बस्तियों का समर्थन: बयान में अप्रत्यक्ष रूप से वेस्ट बैंक (West Bank) जैसे विवादित इलाकों में इजरायली बस्तियों के विस्तार को भी जायज ठहराने की कोशिश की गई है।

बदलते समीकरण: अमेरिका की नई रणनीति?

राजदूत का यह बयान अमेरिकी प्रशासन की उस पारंपरिक ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-राष्ट्र समाधान) की नीति के विपरीत नजर आता है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के सह-अस्तित्व की बात करती है:

  1. खुला समर्थन: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब इजरायल के प्रति ‘सॉफ्ट’ रुख छोड़कर पूरी तरह से उसके विस्तारवादी लक्ष्यों का समर्थन करने की ओर बढ़ रहा है।
  2. अंतरराष्ट्रीय संधियों को चुनौती: सीमाओं के विस्तार की बात करना संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों को चुनौती देने जैसा है जो 1967 के युद्ध के बाद कब्जे में लिए गए इलाकों को खाली करने की मांग करते हैं।

अरब जगत और फिलिस्तीन की तीखी प्रतिक्रिया

इस बयान के सामने आते ही अरब देशों ने एकजुट होकर इसकी निंदा की है:

  • फिलिस्तीनी प्रशासन: फिलिस्तीन के नेतृत्व ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ और क्षेत्र में आग लगाने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान शांति की बची-खुची उम्मीदों को भी खत्म कर देंगे।
  • पड़ोसी देशों की चिंता: जॉर्डन, मिस्र और सऊदी अरब जैसे देशों ने चेतावनी दी है कि सीमाओं के विस्तार का कोई भी प्रयास पूरे क्षेत्र को एक बड़े और विनाशकारी युद्ध में धकेल सकता है।

वैश्विक स्तर पर क्या होगा असर?

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

  • यूरोपीय संघ का रुख: कई यूरोपीय देशों ने इस बयान से खुद को अलग करते हुए दोहराया है कि वे अभी भी सीमाओं के किसी भी एकतरफा बदलाव के खिलाफ हैं।
  • इजरायल में खुशी: इजरायली सरकार के दक्षिणपंथी मंत्रियों ने इस बयान का स्वागत किया है और इसे ‘सच्चाई की जीत’ बताया है।

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