तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान और विदेश मंत्री हाकान फिडान ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में भारत-तुर्की संबंधों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में अपनी रुचि जाहिर की।
तुर्की ने विशेष रूप से भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की इच्छा जताई। इस कदम को दोनों देशों के रक्षा सहयोग को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह सौदा पूरी तरह से साकार होता है, तो यह भारत की रक्षा उत्पादों की वैश्विक पहुँच को बढ़ाने के साथ ही तुर्की की सैन्य क्षमता को भी मजबूत करेगा।
एर्दोगान ने इस अवसर पर कहा कि भारत और तुर्की के बीच संबंधों में नई ऊर्जा और गहराई लाने की आवश्यकता है। उन्होंने व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
तुर्की विदेश मंत्री हाकान फिडान ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रक्षा सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-तुर्की रक्षा सहयोग न केवल दोतरफा संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद तुर्की की रक्षा प्रौद्योगिकी में निवेश और विकास को बढ़ावा दे सकती है।
हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के अधिकारियों की बातचीत से यह संकेत मिलता है कि यह कदम निकट भविष्य में पूरी तरह से संभव है।
इस विकास से भारतीय रक्षा उद्योग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की रणनीतिक स्थिति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
तुर्की और भारत के बीच यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि यह सहयोग दोनों देशों के लिए तकनीकी और सामरिक दृष्टि से फायदेमंद माना जा रहा है।




