Tuesday, March 3, 2026

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आयुर्वेद विश्वविद्यालय की वित्तीय गड़बड़ियों पर खुली विजिलेंस जांच के आदेश

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में सामने आई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की अब विजिलेंस स्तर पर खुली जांच होगी। शासन की संस्तुति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को विजिलेंस जांच की अनुमति प्रदान करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार भ्रष्टाचार और मनमानी के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है।

वित्तीय विभाग की जांच में विश्वविद्यालय में कुल 13.10 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का बड़ा मामला उजागर हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने प्रशासकीय और वित्तीय अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए कई नियम-विरुद्ध निर्णय लिए और भारी भरकम खर्च किए। इनमें कर्मचारियों की अवैध पदोन्नतियां, स्वीकृत न होने के बावजूद नए पदों पर भर्तियां, तथा शासन की अनुमति के बिना निर्माण कार्य कराना शामिल हैं।

जांच में पाया गया कि निर्माण कार्यों और वेतन व्यय से लेकर अन्य विविध मदों में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की गई है। विशेष रूप से, ऐसे पदों पर भी नियुक्तियां की गईं जिन्हें विश्वविद्यालय में स्वीकृति ही नहीं मिली थी। इसके अलावा कई निर्माण कार्य बिना किसी अनुमति और प्रक्रियाओं के उल्लंघन के साथ कराए गए, जो सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का हनन है।

इन गंभीर अनियमितताओं की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने इसे विजिलेंस के हवाले करने की संस्तुति की थी। शुक्रवार को यह फाइल मुख्यमंत्री धामी के सामने प्रस्तुत की गई, जहां उन्होंने तुरंत खुली विजिलेंस जांच की अनुमति देते हुए पत्रावली पर अनुमोदन कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि अब विजिलेंस जल्द ही इस मामले में विस्तृत जांच शुरू करेगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा तय करेगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय इससे पहले भी कई विवादों और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रह चुका है। अब विजिलेंस जांच की अनुमति मिलने के बाद माना जा रहा है कि इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारियों और जवाबदेही को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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